उधमपुर। अतिरिक्त विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने मारपीट के मामले में उधमपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एसएचओ को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस संज्ञेय (गंभीर) अपराध में एफआईआर दर्ज करने से बच नहीं सकती और मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष व समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पीड़ित अश्वनी कुमार ने अदालत में आवेदन देकर आरोप लगाया कि 25 जनवरी को आरोपियों विक्रम, गणेश और शारदा देवी ने उनका रास्ता रोककर हमला किया। हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्होंने जीएमसी उधमपुर में उपचार कराया। पीड़ित का आरोप है कि एसएचओ उधमपुर, चौकी प्रभारी रौन दोमेल और एसएसपी को लिखित शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय केवल निवारक रिपोर्ट दर्ज कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया।
अदालत ने गौर किया कि पुलिस रिपोर्ट में पीड़ित के मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट का कोई जिक्र नहीं था जिसमें कई चोटों की पुष्टि हुई है। मजिस्ट्रेट ने कहा कि यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध प्रकट होता है तो एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। प्रारंभिक जांच सात दिन से अधिक नहीं होनी चाहिए और शिकायत बंद करने पर सूचनादाता को एक सप्ताह के भीतर कारण बताना जरूरी है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अपराध हुआ है या नहीं इसका निर्धारण एफआईआर दर्ज होने के बाद की जांच में होना चाहिए, न कि उससे पहले। साथ ही पुलिस के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं पाया गया। मजिस्ट्रेट ने एसएचओ उधमपुर को आदेश दिया कि वे तुरंत एफआईआर दर्ज करें और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई सुनिश्चित करें।