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दो कमरों में चल रहे दो सरकारी स्कूल, बिना सुविधा कैसे आएंगे छात्र

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उधमपुर-एक कमरे में चल रहे गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल गनेडा में पढते देश के नौनिहाल, जिसमें सामान भी - फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। शहर के बीचोबीच स्थित प्राथमिक विद्यालय गनेडा सरकार के बड़े बड़े दावों को झूठा साबित करने का काम कर रहा है। नाम से तो यह विद्यालय सिर्फ एक है, लेकिन हकीकत में इस विद्यालय की इमारत में करीब 22 साल से दो स्कूल चल रहे हैं। कमाल की बात तो यह है कि शिक्षा विभाग को भी इसकी खबर है।
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शिक्षा विभाग ने समय-समय पर इस विद्यालय का दौरा किया है। विभाग के अधिकारी आते हैं, और विद्यालय की व्यवस्था से संतुष्ट होकर लौट जाते हैं। इस विद्यालय की परेशानी सिर्फ एक नहीं है। विद्यालय में मिड डे मील बनाने के लिए रसोई का प्रबंध नहीं है। मिड डे मील तैयार करने के लिए विद्यालय में एक रसोइया भी तैनात की गई है। लेकिन, विद्यालय में रसोई न होने के कारण यह रसोइया अपने घर से खाना तैयार कर लाती है, और विद्यालय में छात्रों को परोसती है। एक तरफ सरकार चाहती है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़े। लेकिन, सवाल यह है कि ऐसे विद्यालयों में आखिर कौन से अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराएंगे?
नगर के वार्ड नंबर 18 में स्थित इस सरकारी प्राथमिक विद्यालय गनेडा के तीन कमरों की इमारत के एक कमरे में स्कूल कार्यालय है। अन्य दो कमरों में से एक में प्राथमिक विद्यालय गनेडा चलता है, और दूसरे में सरकारी माध्यमिक विद्यालय हाउसिंग कॉलोनी की पूर प्रणाली चलाई जा रही है। वर्तमान में प्राथमिक विद्यालय में छात्रों की संख्या 28 है। अब नए दाखिलों के बाद इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है।
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वहीं, माध्यमिक विद्यालय में 63 विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। कुल मिलाकर मौजूदा समय में इन दो कमरों के दो स्कूलों में 91 विद्यार्थियों को एक साथ पढ़ाया जा रहा है। इन दोनों विद्यालयों का वर्ष 1999 में विलय किया गया था। तब से कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थी इन्हीं दो कमरों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। दो दशक से भी अधिक समय गुजरने के बाद भी न तो कमरों की संख्या बढ़ी, और न ही माध्यमिक विद्यालय हाउसिंग कॉलोनी के लिए कोई नई इमारत बनी।
स्कूल में जगह कम होने के कारण छात्रों के साथ शिक्षक भी परेशान हैं। अधिकतर कक्षाओं को मजबूरी में खुले में चलाना पड़ रहा है। स्कूल में पहले से ही जगह कम है। ऊपर से दो कमरों में विद्यार्थियों के अलावा कुर्सी, मेज, मिड डे मील का राशन और अन्य सामान पड़ा हुआ है। इससे दो कमरों की जगह और भी छोटी हो गई है। देखने से ये कक्षाएं विद्यालय कम, स्टोर रूम ज्यादा लगती हैं।
कमाल की बात तो यह है कि विद्यालय की यह हालत देखने के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी व्यवस्था से संतुष्ट होकर लौट जाते हैं। इस विद्यालय में शारदा, हाउसिंग कॉलोनी, शिव नगर, गंगेडा व इसके आसपास के करीब 91 छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। इनमें से 28 छात्रों को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक तैनात हैं। वहीं, दूसरे कमरे में चलने वाले सरकारी माध्यमिक विद्यालय के कुल 63 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए आठ अध्यापक हैं।
शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय में हर सत्र में छात्रों की संख्या 90 से अधिक रहती है। किसी-किसी सत्र में इससे अधिक भी हो जाती है। लेकिन, इन्हें उचित तरीके से बैठाकर पढ़ाने के लिए कमरों की कमी खलती है। आठ अलग-अलग कक्षाओं के 60 से 70 छात्रों को एकसाथ बैठाकर पढ़ाना मुश्किल है। इसलिए, अधिकतर कक्षाओं को स्कूल के आंगन में चलाना पड़ता है। तेज धूप और बारिश में परेशानी काफी बढ़ जाती है। इन अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए आठ कमरों की आवश्यकता है।
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शिक्षा विभाग को इस बारे में पूरी जानकारी है। उनकी टीम समय-समय पर स्कूल का निरीक्षण भी करती है। कमरों की कमी के बावजूद स्कूल प्रबंधन व शिक्षक छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने का पूरा प्रयास करते हैं, जिसके कारण यहां हर सत्र में छात्रों की संख्या अच्छी रहती है। इस सत्र में भी नए दाखिलों के बाद छात्रों की संख्या बढे़गी। अगर स्कूल में कमरों की संख्या बढ़ती है तो इन दोनों स्कूलों में छात्रों का नामांकन और भी अधिक बढ़ेगा।
- नीरू बाला, संस्थान प्रमुख

उधमपुर-एक कमरे में चल रहे गवर्नमेंट मिडिल स्कूल हॉऊसिंग कॉलोनी में एकसाथ आठ कक्षाओं को पढाते शिक?- फोटो : UDHAMPUR

उधमपुर-दो कमरों की इमारत के दो स्कूलों में कमरों की कमी के कारण बाहर बिठाकर छात्रों को पढाते शिक्?- फोटो : UDHAMPUR

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