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कोकून के उत्पादन में उधमपुर का राज्य में दूसरा स्थान

Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
Udhampur
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उधमपुर। वर्ष 2011 की कोकून मंडी में कोकून के उम्मीद से काफी कम दाम मिलने के कारण 2012 में 2011 के मुकाबले करीब 500 कीट पालकों की संख्या और 30 हजार किलो कोकून के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। जिससे सेरीकल्चर विभाग उधमपुर चिंतित है। सेरीकल्चर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ देकर और बढ़िया क्वालिटी का सीड देकर कीट पालन के साथ जोड़ा जाएगा ताकि उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके। कोकून उत्पादन में उधमपुर राज्य में राजोरी के बाद दूसरे स्थान पर है। जहां हर वर्ष करीब पांच हजार कीट पालक गुणवत्ता भरी कोकून तैयार करते हैं। ज्यादातर कोकून को बंगाल और अन्य राज्यों के व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं। कोकून उत्पादन में वर्ष 2010 को कीट पालक कभी नहीं भूल पाएंगे। क्योंकि, यही वो साल था जब कीट पालकों को मंडी में उम्मीद से कहीं ज्यादा कोकून के दाम मिले थे।
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2010 में 4981 कीट पालकों ने सेरीकल्चर विभाग के साथ जुड़कर कीट पालन किया। इन कीट पालकों ने 1,41,000 किलो हरी कोकून का उत्पादन किया जिसकी कीमत दो करोड़ 21 लाख, 33 हजार रुपये रही। इस वर्ष ड्राई कोकून का सबसे ऊंचा दाम 738 रुपये प्रति किलो रहा जो कि अभी तक का पूरे राज्य में सबसे ऊंचा दाम था, लेकिन 2011 में अचानक कोकून के दाम में गिरावट आने से कीट पालकों की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फिर गया। इस साल 5427 कीट पालकों ने 1,83,400 किलो कोकून का उत्पादन किया। 2010 के मुकाबले 42400 किलो कोकून का अधिक उत्पादन करने के बावजूद कीट पालकों को 26,99, 400 राशि कम मिली। कम दाम मिलने के कारण ही 2012 में मंडी में कीट पालकों की संख्या और उत्पादन ने सेरीकल्चर विभाग को परेशान कर दिया है।
हालांकि वर्ष 2012 की दो कोकून मंडी में 4864 कीट पालकों ने 1,46,083 किलो कोकून बेची है। जिसकी कुल कीमत दो करोड़ 1364511 रुपये मिली है। उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले में 37317 किलो और कीट पालकों की संख्या 563 कम है।
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