पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने महिला आरक्षण विधेयक को संसद में चर्चा के लिए मंजूरी देने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत किया और इसे एक महान कदम बताया। मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, मुख्य रूप से पुरुष राजनीतिक परिदृश्य के कठिन इलाके को पार करने के बाद, मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि आखिरकार महिला आरक्षण विधेयक एक वास्तविकता बन जाएगा।आबादी का आधा हिस्सा होने के बावजूद, हमारा प्रतिनिधित्व बहुत कम है। यह एक महान कदम है।' मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया था कि कैबिनेट ने महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी है, लेकिन एक घंटे के भीतर पोस्ट को हटा दिया गया।
मुफ्ती ने कहा कि संसद में विधेयक पारित होने में कभी देर नहीं हुई क्योंकि पुरुष-प्रधान राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, ''यह एक अच्छा कदम है। देर से ही सही, लेकिन कभी भी देर नहीं हुई। मैं खुद एक महिला होने के नाते बहुत कुछ झेल चुकी हूं और आपको पुरुष-प्रधान राजनीतिक परिदृश्य में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।''
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य विधानसभा हो या संसद, निर्णय पटल पर महिलाओं को जगह मिले। उन्होंने कहा, "देश भर में महिलाओं को जिन चुनौतियों, अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें देखते हुए मुझे लगता है कि यह बिल लाने का सही समय है।" मुफ्ती ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की टिप्पणी "बिल हमारा है" से सहमति जताते हुए कहा कि यह उनके पति, दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे, जिन्होंने महिलाओं को पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर समान अनुपात की नींव रखी थी।
नेकां महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ नहीं: उमर
नेशनल कांफ्रेंस(नेकां) महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ नहीं है। अगर इसे लागू किया जाता है तो कोई आपत्ति नहीं है। पार्टी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा, हम महिला आरक्षण के कब विरोधी रहे हैं? हमने खुद ही इसे यहां की पंचायतों और अन्य जगहों पर लागू किया है। हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, हमारी आबादी का 50 फीसदी हिस्सा हमारी बहनें, माताएं हैं। उन्हें जनता का प्रतिनिधि बनने का मौका मिलना चाहिए। अब्दुल्ला ने बडगाम में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा।
यह पूछे जाने पर कि क्या इससे जम्मू-कश्मीर में पार्टी की संभावनाओं पर असर पड़ेगा, अब्दुल्ला ने कहा कि पार्टी के पास क्षमतावान महिला नेताओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा, इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? क्या आपको लगता है कि हमारे पास आरक्षित सीटों पर चुनाव में खड़ी होने वाली कोई महिला नहीं है? हमारे पास एक महिला विंग है और उन्होंने अपनी लड़ाई लड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। किसी भी बिल से हम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हम केवल इसलिए पीड़ित हैं क्योंकि यहां के शासक चुनावों से डरते हैं। वे बेताज बादशाह बन गए हैं। वे चुनाव नहीं कराना चाहते। खतरा उनसे है जो चुनाव से भाग रहे हैं।