घाटी में पड़ रही कड़ाके की ठंड के कारण कश्मीर के वेटलैंड्स में हर वर्ष आने वाले प्रवासी पक्षी भी बेहाल हो रहे हैं। कश्मीर के वेटलैंड्स में झीलों के जमने से लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षी बेहाल हैं।
उन्हें खुराक की दिक्कतें होने लगी हैं। पक्षियों को राहत दिलाने के लिए वेटलैंड विभाग दिन रात जुटा हुआ है। कश्मीर संभाग के प्रसिद्ध होकरसर वेटलैंड में विभाग के लोग सुबह-सुबह कश्तियों में सवार होकर वेटलैंड में जमी झील का बर्फ तोड़ने में लग जाते हैं। क्योंकि रात में कश्मीर का तापमान माइनस पांच के करीब तक नीचे चला जाता है। इस कारण वेटलैंड की झीलें जम जाती हैं, जिससे जमी झीलों में कश्मीर आए करीबन लाखों पक्षियों को खुराक मिलना मुश्किल हो जाता है। विभाग के लोग बर्फ तोड़कर पानी में इन पक्षियों के लिए खुराक डालते हैं।
वेटलैंड्स वार्डन इम्तियाज अहमद लोन के अनुसार, रात का पारा शून्य से नीचे चले जाने से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। झीलें जमने से पक्षियों को उनका प्राकृतिक आहार नहीं मिल पाता है, जिसके लिए अब विभाग के लोग काफी मेहनत कर रहे हैं। वह अब पक्षियों के लिए मैनुअल फीडिंग कर रहे हैं।
मैनुुअल फीडिंग करवाने वाले गुलाम नबी के अनुसार, आजकल गिरते तापमान के कारण प्रवासी पक्षियों के साथ-साथ विभाग के कर्मचारियों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्हें बर्फ की परत को तोड़ते हुए झीलों के भीतर जाना पड़ता है और पक्षियों के लिए आहार का प्रबंध करना पड़ता है।
गुलाम नबी के अनुसार, वह इन पक्षियों को धान के कण डालते हैं। यह कण पानी पर तैरते हैं, जिससे पक्षियों को चुगने में आसानी हो जाती है। गुलाम नबी ने बताया कि जो पक्षी इस समय यहां हैं, उन्हें आहार देने की जिम्मेदारी विभाग के कर्मचारी निभा रहे हैं ताकि वह भूखे न रहें।
गौरतलब है कि कश्मीर में कई वेटलैंड्स हैं, जहां हर वर्ष लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षी दुनिया के कई कोनों से पहुंचते हैं। यह पक्षी दुनिया की उन जगहों से आते हैं, जहां पारा माइनस 30 डिग्री तक गिर जाता हैं। नार्थ यूरोप, साइबेरिया, चाइना, सेंट्रल एशिया में सभी झीलें ठंड से जम गई होती हैं।
इनमें ज्यादा संख्या ग्रेयलेग गीज, मल्लर्ड्स, विजंज, शोवेल्लेर्स, टील्ज, कूट्स, पोचार्डस और ब्राह्मणी डक्स की होती है। इनके यहां आने का मुख उद्देश्य होता है भीषण ठंड से बचना। इसके साथ ही उन्हें यहां अनुकूल वातावरण मिलता है।