Rajnath Singh Jammu Kashmir Visit
- फोटो : एजेंसी
वहीं, जीओसी डैगर डिवीजन मेजर जनरल अजय चांदपुरिया ने उन्हें जमीनी स्थिति के बारे में जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने सैनिकों के साथ बातचीत की और राष्ट्र सेवा में उनके धैर्य व साहस को सलाम किया। विजिटर बुक पर रक्षा मंत्री ने लिखा, देश की सुरक्षा के लिए निरंतर मुस्तैदी के साथ तैनात सभी बहादुर सैनिकों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आप सभी की वीरता और राष्ट्रभक्ति हमारे देश की सुरक्षा का आधार है। मैं तीन राजपूत, रुस्तम बटालियन के सभी सैनिकों को तैयारियों का उच्चतम स्तर बनाए रखने के लिए बधाई देता हूं।
उन्होंने गलवान घाटी में शहीदों को याद किया। ट्वीट कर लिखा, देश के सम्मान के लिए वीरता पूर्वक लड़ने और 15-16 जून, 2020 को अपने प्राणों की आहुति देने वाले इन वीरों को नमन करता हूं। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा।
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रक्षा मंत्री ने बारामुला के डैगर वॉर मेमोरियल में पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्हें सेना के आधुनिक हथियार और उपकरण दिखाए गए। इसके बाद रक्षा मंत्री एक बड़ा खाना में शामिल हुए, जिसमें बीएसएफ, सीआरपीएफ और जेकेपी के साथ डैगर डिवीजन के 500 जवान शामिल हुए। राजनाथ सिंह ने उनके अनुशासन, राष्ट्रीय प्रतिबद्धता और राष्ट्र के प्रति सेवा की सराहना की। जीओसी डैगर डिवीजन ने रक्षा मंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
क्या था ऑपरेशन बलवान
18 सितंबर, 2021 को सेना ने उड़ी सेक्टर में पाकिस्तान से आतंकियों की एक घुसपैठ को नाकाम किया था। इसमें छह पाकिस्तानी आतंकी शामिल थे। दो आतंकी भारतीय सीमा में दाखिल हो गए थे। इनका सफाया करने के लिए सेना जाट रेजिमेंट ने एक तलाशी अभियान चलाया। इसको बलवान नाम दिया गया। 25 सितंबर को सेना ने इन दोनों को उड़ी के सलामाबाद नाले में घेर लिया। चारों तरफ से घिरता देख इन आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसमें एक जवान घायल हुआ था।
फिर 26 सितंबर की सुबह सेना ने एक आतंकी मार गिराया और दूसरे ने सरेंडर कर दिया था। इस ऑपरेशन बलवान का नेतृत्व जाट रेजीमेंट के कैप्टन मुश्ताक ने किया। 2016 में उड़ी हमले के दौरान भी पाकिस्तानी आतंकी इसी नाले से कश्मीर में दाखिल हुए थे।
दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद भारतीय सेना की 19 इंफैंट्री डिवीजन के तत्कालीन जीओसीए मेजर जनरल वीरेंद्र वत्स ने उड़ी में प्रेसवर्ता कर एलओसी पर पाकिस्तान की बड़ी साजिश का खुलासा किया था। जीओसी के मुताबिक, भले ही अली बाबर का दावा है कि वो इन हथियार और गोला बारूद को उत्तरी कश्मीर के पट्टन तक सप्लाई करने आया था, लेकिन हकीकत यह है कि लश्कर के ये आतंकी 2016 के उड़ी हमले को दोहराना चाहते थे।
उन्होंने बताया था कि कारी अनस ही वह दूसरा आतंकी था, जो 26 सितंबर को भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। ऑपरेशन बलवान में पकड़े गए आतंकी अली बाबर ने पूछताछ में खुलासा किया था कि उसे पाकिस्तान में ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद वह छह पाकिस्तानी आतंकियों के साथ 18 सितंबर को एलओसी पर पाकिस्तानी सेना की जाबरी पोस्ट से घुसपैठ की। लेकिन एलओसी पर ही इन सभी का सामना भारतीय सेना की जाट रेजीमेंट की पेट्रोलिंग पार्टी से हो गया था।