पीओके में ली आतंकी ट्रेनिंग, फिर लौटा कश्मीर
जरगर सक्रिय आतंकवादी है और श्रीनगर के नौहट्टा इलाके का रहने वाला है। वह 1988 में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट में शामिल हुआ था। पीओके में आतंकी ट्रेनिंग लेकर 1989 में वह जम्मू-कश्मीर लौटा। लट्रम आठ दिसंबर 1989 को तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण करने वाले आतंकियों में भी शामिल था।
हत्या के तीन दर्जन मामले दर्ज हैं जरगर के खिलाफ
जरगर ने 1991 में अल-उमर मुजाहिदीन नाम से खुद का आतंकवादी समूह बनाया। पिछले कुछ वर्षों में श्रीनगर में जरगर के खिलाफ कम से कम तीन दर्जन हत्या के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें उच्च पदस्थ अधिकारियों की कथित हत्याएं भी शामिल हैं। जरगर को 15 मई 1992 को गिरफ्तार कर जेल में डाला गया था ।
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उसे 31 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट आईसी-814 के बंधकों को मुक्त कराने के लिए जेल से रिहा कर पाकिस्तान तक सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया। इसके तुरंत बाद जरगर ने मुजफ्फराबाद में अल-उमर मुजाहिदीन को फिर से जीवित कर दिया।इनके घरों की भी ली गई तलाशी
20 आतंकी मददगारों के घरों पर पुलिस की छापेमारी
पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक, आतंकी मददगारों में से जिनके घरों की तलाशी ली गई उनमें आदिल नजीर जनादा, फैज्यब शौकत देवानी, मोमिन अहमद शेख, फैयाज अहमद कल्लू, शौकत अहमद खंडवा, मोहम्मद बारिक मागरे, मोहम्मद रफीक शाह, यासिर हयात अहंगर, शेख फैसल राशिद, मुमिन जावेद गोजरी, सुहैब बिन शफी, परवेज अहमद शाह, इम्तियाज अहमद खांडे, फैयाज अहमद शेख, वाहिद अब्बास, शाहिद अहमद लोन, इम्तियाज अहमद चिकला, गुलजार अहमद मल्ला, नजीर अहमद कंधू उर्फ लारा और शब्बीर अहमद गोजरी शामिल हैं।
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प्रवक्ता ने बताया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामलों की जांच को आगे बढ़ाने और आतंकियों के सभी बुनियादी ढांचे को खत्म करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। तलाशी के दौरान कार्यकारी मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाह भी मौजूद रहे।