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सुरक्षा एजेंसियों को पूरी आजादी, आतंकियों को जल्द चुकानी होगी कीमत

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श्रीनगर। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने शहर में दो अल्पसंख्यक शिक्षकों की हत्या पर कहा है कि हमने सुरक्षा एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी है। मानवता के दुश्मन इन आतंकवादियों को जल्द ही इसकी कीमत चुकानी होगी। बेगुनाहों के खून के एक-एक कतरे का जब तक हिसाब नहीं ले लिया जाता तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। आतंक के सरपरस्तों को भी मैं कहना चाहता हूं जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और समृद्धि की यात्रा को अस्थिर करने के उनके मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।
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उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के सवा करोड़ नागरिकों की सुरक्षा हमारी सुरक्षा एजेंसियों का दायित्व है। मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं, इसमे कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। हर एक जीवन की रक्षा हमारा सर्वोच्च दायित्व है और हम आपको इसका भरोसा देते हैं। मैं पूरे देश और जम्मू-कश्मीर के सवा करोड़ नागरिकों को फि र से आश्वस्त करना चाहता हूं कि आतंकवादियों और उनके पनाहगारों को बख्शा नहीं जाएगा। संतों-फ कीरों की इस इस धरती से आतंक को जड़ से उखाड़कर ही हम दम लेंगे। अब यह तय है कि जिस तरक्की के रास्ते पर जम्मू कश्मीर चल पड़ा है वह यात्रा रुकने वाली नहीं है। जम्मू-कश्मीर के हर एक नागरिक के सपने को पूरा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। सभी लोग बेखौफ होकर जीवन जी सके, इसके लिए जीवन के हर क्षण, हर पल हम पूरी शिद्दत से काम करेंगे।
बेगुनाहों की हत्या से हर ओर रोष
उप राज्यपाल ने कहा कि मैं आतंकी हमले में मारे गए नागरिकों को नमन करता हूं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। दुख की इस घड़ी में जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पूरे देश की संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। मेरे मन में बहुत पीड़ा और आक्रोश है। मैं परिवार के सभी सदस्यों को भरोसा देता हूं कि आपके एक-एक आंसुओं का हिसाब लिया जाएगा। 130 करोड़ देशवासी सभी परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। बेगुनाहों की बर्बर हत्याओं की वजह से सर्वधर्म समभाव की धरती जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश में आज रोष है। चाहे श्रीनगर हो, बंदीपोरा हो, जम्मू हो, दिल्ली हो, मद्रास हो, हर एक भारतवासी का खून खौल रहा है। मैं आपकी पीड़ा, आपकी भावनाएं समझता हूं और भरोसा देता हूं।
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जम्मू-कश्मीर की तरक्की आतंक के सरगनाओं को रास नहीं आ रही
उप राज्यपाल ने कहा कि पिछले दो सालों में जम्मू-कश्मीर में तरक्की की नई ऊंचाइयां पड़ोसी मुल्क और उसके चंद आतंकी समर्थकों को बर्दाश्त नहीं हो रही है। आज जम्मू-कश्मीर का युवा विकास चाहता है। दशकों बाद नए सपनों के साथ, नए रोल मॉडल अब जम्मू-कश्मीर के युवाओं के सामने हैं। हर एक क्षेत्र, हर एक नागरिक इतिहास को भूलकर अब भविष्य उन्मुख हो चुका है। जुलाई में 10.5 लाख पर्यटक जम्मू-कश्मीर आए थे। जुलाई में 11.28 लाख और सितंबर में यह आंकड़ा सवा 12 लाख से ऊपर हो गया है। बड़े-बड़े उद्योग यहां निवेश करने को आतुर हैं। यह बात उस पार बैठे आतंक के सरगना और यहां मौजूद उनके कुछ मतावलंबियों को रास नहीं आ रही है। वह नहीं चाहते यहां अमन और समृद्धि आए। इसलिए मैं जम्मू-कश्मीर के बुद्धिजीवियों से भी आग्रह करना चाहता हूं कि एकजुट होकर ही हम मानवता के सबसे बड़े दुश्मन आतंकवाद का मुकाबला कर सकते हैं।
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