उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कोर्ट का अधिकार है कि वो फैसला सुनाए। जबकि, जिन लोगों पर फैसला सुनाया गया है, उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने और निर्णय बदलने का प्रयास करने का अधिकार है।
एनआईए कोर्ट ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक को आज दोषी करार दिया है। इस पर नेकां नेता एवं जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फैसला सुनाना अदालत का अधिकार है।
विज्ञापन
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कोर्ट का अधिकार है कि वो फैसला सुनाए। जबकि, जिन लोगों पर फैसला सुनाया गया है, उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने और निर्णय बदलने का प्रयास करने का अधिकार है। यासीन मलिक ऐसा करता है या नहीं करता यह उस पर निर्भर करता है।
एनआईए कोर्ट ने यासीन मलिक को दोषी पाया है, उसे इस मामले में सजा 25 मई को सुनाई जाएगी। यासीन मलिक ने बीते दिनों खुद कबूला था कि वह कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है। यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) से जुड़ा है। 2019 में केंद्र सरकार ने जेकेएलएफ पर प्रतिबंध लगा दिया था। मलिक अभी तिहाड़ जेल में बंद है।
विज्ञापन
यासीन पर 1990 में एयरफोर्स के 4 जवानों की हत्या का आरोप है, जिसे उसने स्वीकारा था। उस पर मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण का भी आरोप है। मलिक पर 2017 में कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने जैसे तमाम गंभीर आरोप है। यासीन मलिक ने दिल्ली की अदालत में यूएपीए के तहत दर्ज ज्यादातर मामलों में अपने पर लगे आरोपों को मंजूर कर लिया है।