-लंबे समय से अटके प्रोजेक्टों में देरी के चलते लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करने के लिए मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। जिले में आधारशिला रखे जाने के 19 साल बाद भी जिले के डोगरीपोरा और रेशीपोरा में झेलम नदी पर बने दो पुलों का काम अधूरा पड़ा है। इसकी वजह से सैकड़ों लोगों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को रोजाना नाव से नदी पार करनी पड़ती है। उनकी जान को हर पल खतरा बना रहता है।
डोगरीपोरा पुल को 2006 में मंजूरी मिली थी और इसका निर्माण 2008 में शुरू हुआ था। रेशीपोरा पुल पर काम इसके कुछ ही समय बाद शुरू हुआ था। लगातार सरकारों से करीब दो दशकों तक आश्वासन मिलने के बावजूद ये दोनों प्रोजेक्ट अभी भी अटके हुए हैं। इसकी मुख्य वजह फंडिंग की कमी और प्रशासनिक देरी बताई जा रही है। लोगों को डर है कि अगर इन प्रोजेक्ट्स को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया तो गंडबल नाव हादसे जैसी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
डोगरीपोरा के रहने वाले सुहेल अहमद ने बताया कि इस देरी ने लोगों की जिंदगी बहुत मुश्किल बना दी है। नदी पार करते समय कई लोगों को चोटें लगी हैं। ये पुल हमारी जीवन रेखा है जो हमारे गांवों को नेशनल हाईवे और पांजगाम रेलवे स्टेशन से जोड़ेंगे। इनके पूरा होने से ट्राल और शाहूरा के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
रेशीपोरा के लोगों ने बताया कि उन्हें हाईवे तक पहुंचने के लिए करीब 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। अगर पुल चालू होता तो यह सफर कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता। स्थानीय निवासी अली मंसूर ने कहा कि यह सिर्फ एक असुविधा नहीं बल्कि रोज़ाना की परेशानी है। आपात स्थिति या खराब मौसम के दौरान हम पूरी तरह से कटे हुए महसूस करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक परिवहन की कमी ने बच्चों और बुजुर्गों के लिए मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं।
डोगरीपोरा के एक और निवासी इमरान नबी ने बताया कि पुल का करीब 70 प्रतिशत ढांचा पहले ही बनकर तैयार हो चुका था लेकिन अचानक काम रोक दिया गया। इसकी आधारशिला पीडीपी-कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी। जम्मू-कश्मीर प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (जेकेपीसीसी) ने 2007-08 में इस पर काम शुरू किया था। तब से लेकर अब तक यह अधूरा ढांचा उन वादों की याद दिलाता है जो कभी पूरे नहीं हुए। पिछले साल सरकार ने डोगरीपोरा पुल को पूरा करने के लिए 1,529.47 लाख रुपये मंजूर किए थे जिससे वहां के निवासियों में उम्मीदें जगी थीं। हालांकि जमीनी स्तर पर कोई खास प्रगति देखने को नहीं मिली है।
प्रशासनिक मंजूरी के इंतजार में डीपीआर
रेशीपोरा पुल के लिए एक संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है जिसमें बचे हुए काम की लागत 1,383.01 लाख रुपये आंकी गई है। यह रिपोर्ट अब प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों पुल आंशिक रूप से पूरे हो चुके हैं और वित्तीय दिक्कतों के चलते इन पर काम रोक दिया गया था। अधिकारी ने कहा कि जैसे ही मंजूरी मिल जाएगी। टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हमें जनता की चिंताओं की पूरी जानकारी है और हम जल्द से जल्द काम दोबारा शुरू करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।