- मृतका के परिवार ने लगाया उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप
- अस्पताल ने आरोपों से किया इन्कार, शुरुआती जांच में कोई लापरवाही नहीं मिली
- मारपीट में स्वास्थ्य कर्मचारियों को आई चोटें, सरकारी संपत्ति को पहुंचा नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। अनंतनाग के श्रीगुफवारा की रहने वाली 85 वर्षीय एक महिला की शुक्रवार देर शाम को सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अनंतनाग में मौत हो गई। मृतका के परिवार ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। रिश्तेदारों व स्थानीय लोग अस्पताल में प्रदर्शन करने लगे। लोगों के एक समूह ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ मारपीट की। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
मिली जानकारी के अनुसार मृतक महिला की पहचान खजीदा के रूप में हुई है। जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो उसे सबसे पहले एक स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। उसके परिवार वालों के मुताबिक बाद में उसे विशेष इलाज के लिए जीएमसी अनंतनाग रेफर कर दिया गया। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद इमरजेंसी वार्ड में किसी हृदय रोग विशेषज्ञ ने उसकी जांच नहीं की। परिवार के एक सदस्य ने पत्रकारों को बताया कि स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों ने हमसे कहा था कि जीएमसी अनंतनाग में एक हृदय रोग विशेषज्ञ उसकी जांच करेगा लेकिन ऐसी कोई जांच नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि अगर समय पर उसकी जांच हो गई होती तो जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने महिला की मौत के लिए गंभीर देखभाल में हुई देरी को जिम्मेदार ठहराया। इन आरोपों के बाद दुखी रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर के अंदर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। लोगों के एक समूह ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। इससे अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचा और स्वास्थ्य कर्मचारियों को चोटें आईं।
अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। एक अधिकारी ने बताया कि लोगों के एक समूह ने जीएमसी के अंदर हंगामा खड़ा कर दिया। अस्पताल के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और कर्मचारियों को चोटें आईं। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। जांच में उन घटनाओं के क्रम पर भी गौर किया जाएगा जिनके कारण यह हंगामा हुआ।
इस बीच जीएमसी के वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अस्पताल कर्मचारियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना निंदनीय है। स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता। डॉक्टर ने कहा कि आरोप सामने आते ही हमने लापरवाही के दावों की जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति बनाई। शुरुआती जांच में कोई चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पाई गई। बिना पुख्ता तथ्यों के हिंसा का सहारा लेना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी : एसोसिएशन
इस बीच ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने 24 अप्रैल की शाम को गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अनंतनाग में एक जूनियर डॉक्टर पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। एक बयान में उन्होंने कहा कि डॉ. ऐनुल हुदा पर मरीज के साथ आए लोगों ने तब हमला किया जब उन्होंने एक ऐसे मरीज की जांच की जिसके वाइटल्स (शारीरिक संकेत) रिकॉर्ड नहीं हो पा रहे थे। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासन से स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने आगे कहा कि तनावपूर्ण आपात स्थितियों में काम करने वाले डॉक्टरों को निशाना बनाने के बजाय उनका साथ दिया जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र के अस्पतालों में सुरक्षा के और भी कड़े इंतजाम करने की मांग की। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने के लिए एसएसपी अनंतनाग का धन्यवाद किया और उम्मीद जताई कि इस संबंध में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों ने किया सांकेतिक प्रदर्शन
इस घटना के बाद डॉक्टरों ने सांकेतिक प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने ड्यूटी के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। एक डॉक्टर ने कहा कि पिछले सात दिन में इस तरह के पांच हमले हो चुके हैं। हमारी सरकार से अपील है कि डॉक्टरों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जाएं।