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Srinagar: डल में जमी बर्फ की परत, शिकारा और हाउसबोट मालिक परेशान, नाव आगे बढ़ाने के लिए करनी पड़ रही मशक्कत

Mon, 23 Dec 2024 01:00 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

डल झील में बर्फ की परत जमने से पर्यटकों के लिए यह दृश्य रोमांचक बन गया, जबकि शिकारा और हाउसबोट चालकों को संचालन में मुश्किलें आ रही हैं।

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श्रीनगर डल झील - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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कश्मीर घाटी में हाड़ कंपा देने वाली ठंड से डल झील में बर्फ की परत जम गई है। इससे शिकारा वालों और हाउसबोट संचालकों के लिए पेरशानी बढ़ गई है। ये लोग अपनी आजीविका को लेकर भी चिंतित हैं। चिल्ले कलां के आगे बढ़ने के साथ जैसे-जैसे तापमान में गिरावट आएगी यह समस्या विकराल बनती जाएगी।

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हालांकि, पर्यटक झील में जमी बर्फ का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। पर्यटक रीमा शर्मा ने कहा, यह दृश्य अद्भुत है। झील पर बर्फ की परत जमी हुई है, जो सर्दी के मौसम को और भी खूबसूरत बना रही है। हम इस अनुभव का भरपूर आनंद ले रहे हैं। वहीं, शिकारा और हाउसबोट चलाने वालों का कहना है कि ठंड के कारण पानी का जमना उनके काम को कठिन बना रहा है।

झील पर पर्यटन उद्योग का बड़ा हिस्सा शिकारा व हाउसबोट से जुड़ा है, लेकिन अब पानी के जमने से उनके लिए नावों को चलाना मुश्किल हो गया है। शिकारा चालक अब्दुल रजाक ने कहा, हमारे लिए यह समय बहुत कठिन है। में शिकारा निकालने के लिए बर्फ की परतों को हटाना पड़ता है। हाउसबोट मालिक मंजूर अहमद का कहना है कि झील के जमने से उनके व्यवसाय पर असर पड़ा है। हम हाउसबोट में ही रहते हैं। ठंड बढ़ने के साथ हाउसबोट में पानी की पाइपलाइन जम गई है। यह समय पर्यटकों के लिए तो बहुत अच्छा होता है, लेकिन हमारे लिए मुसीबतों से भरा रहता है।

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डल झील की बर्फीली परतों से पर्यटक खुश, शिकारा चालक और हाउसबोट मालिक परेशान 
कश्मीर घाटी में स्थानीय लोग ठंड से बचने के लिए कड़ी तैयारी कर रहे हैं, जबकि ठंड का आनंद लेने के लिए पर्यटक कश्मीर पहुंच रहे हैं। वहीं कड़ाके की ठंड पड़ते ही डल झील के पानी का कुछ हिस्सा बर्फ में तब्दील होने लगा है। श्रीनगर में तापमान माइनस में जा पहुंचा है, जिससे डल झील में बर्फीली परतें बनने लगी हैं।

कड़ाके की ठंड की वजह से डल झील के बिचले हिस्से में और किनारे में बर्फ की परतों का बनना शुरू हो गया है। हालांकि, पूरी झील अभी तक नहीं जमी है। पर जैसे - जैसे तापमान में गिरावट आएगी डल झील पूरी तरह से जम जाएगी और झील से रोज़ी रोटी कमाने वाले लोगों के लिए परेशानियां बढ़ती जाएंगी।

जहां एक ओर पर्यटक झील पर जमी बर्फ का आनंद ले रहे हैं, वहीं बोट चालक इस ठंड के कारण अपनी आजीविका को लेकर भी चिंतित हैं। पर्यटकों के लिए डल झील का जमना एक नया और रोमांचक अनुभव बन गया है। पर्यटक झील पर जमी बर्फ के दृश्यों का आनंद लिया। एक पर्यटक, रीमा शर्मा ने कहा, "यह दृश्य वाकई अद्भुत है। डल झील पर बर्फ की परत जमी हुई है, जो यहां के सर्दी के मौसम को और भी खूबसूरत बना रही है। हम इस अनुभव का भरपूर आनंद ले रहे हैं।

लेकिन दूसरी ओर, बोट चालक इस मौसम से परेशान हैं। शिकारा और हाउसबोट संचालन में रुकावट आने से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ा है। शिकारा और हाउसबोट चलाने वाले मजदूरों और मालिकों का कहना है कि ठंड के कारण पानी का जमना उनके काम को कठिन बना रहा है। डल झील पर पर्यटन उद्योग का बड़ा हिस्सा इन शिकारा और हाउसबोट से जुड़ा हुआ है, लेकिन अब पानी के जमने से उनके लिए अपनी नावों को चलाना मुश्किल हो गया है।

शिकारा चालक अब्दुल रज़ाक ने कहा, हमारे लिए यह समय बहुत कठिन है। झील का पानी जमने से हमारी नावें चलाना मुश्किल हो गया है। आमतौर पर इस समय हम पर्यटकों को शिकारा राइडिंग की सुविधा देते हैं, लेकिन अपनी नावों को निकालने के लिए हमें बहुत संघर्ष करना पड़ता है। हमें शिकारा निकालने के लिए बर्फ की परतों को हटाना पड़ता है फिर कहीं जाकर हमारा शिकारा निकल पाता है।

हाउसबोट मालिक मंज़ूर अहमद का कहना है कि झील के जमने के कारण उनके व्यवसाय पर बहुत बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा "हम यहीं हाउसबोट में रहते हैं, बर्फ जमने से बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ठंड बढ़ने के साथ हाउसबोट में पानी की पाइपलाइन जम जाती है। जिसके लिए हमें आग जलाकर पानी की पाइपलाइन को खोलना पड़ता है। ये समय पर्यटकों के लिए तो बहुत अच्छा होता है पर हमारे लिए मुसीबतों से भरा रहता है।

श्रीनगर डल झील - फोटो : बासित जरगर
कैसे जमती है डल झील
डल झील सर्दियों में तब जम जाती है जब कश्मीर घाटी का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। जब पानी का तापमान बहुत कम हो जाता है, तो झील का पानी जमने लगता है। झील का ऊपरी हिस्सा पहले जमता है क्योंकि यह ठंडे वातावरण में अधिक संपर्क में होता है, और धीरे-धीरे पूरी झील के पानी का तापमान शून्य डिग्री तक पहुंचने पर झील पूरी तरह से जमी हुई दिखाई देती है। इस प्रक्रिया में हवा, पानी की गहराई, और वातावरण की ठंडक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 
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चिल्ले कलां - फोटो : बासित जरगर
चिल्ले कलां के पहले ही दिन 8.5 डिग्री सेल्सियस रहा तापमान
कश्मीर में शुरू हुए चिल्ले कलां के पहले दिन तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो इस सर्दी का अब तक का सबसे कम तापमान है। चिल्ले कलां, जो कश्मीर की सर्दियों का सबसे कठोर दौर होता है, में तापमान में भारी गिरावट देखी जा रही है, जिससे घाटी में सर्दी की तीव्रता बढ़ गई है। चिल्ले कलां के पहले दिन के तापमान ने कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में ठंड में वृद्धि कर दी है।

चिल्ले कलां के बाद चिल्ले बच्चा और चिल्ले खुर्द का दौर शुरू होगा, जिसमें मौसम थोड़ा ठंडा तो रहता है, लेकिन ठंड में कमी आती है और लोग सर्दी से थोड़ी राहत महसूस करते हैं।
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