बडगाम में कथ बात के दौरान महबूबा मुफ्ती। संवाद
- बडगाम में आयोजित कार्यक्रम में अहम मुद्दों को सुना, बातचीत और जुड़ाव का किया आह्वान
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को लगातार बातचीत और लोगों के साथ गहरे जुड़ाव की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने युवाओं में बढ़ती परेशानी और बडगाम को प्रभावित करने वाले कई जरूरी मुद्दों पर चिंता जताई।
बडगाम में कथ-बात के दौरान उन्होंने युवाओं और बुज़ुर्गों समेत सभी प्रतिभागियों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने खुलकर अपनी चिंताएं साझा कीं। उन्होंने इस सभा को सामूहिक जागरूकता और लोगों की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक बताया। इस बात को दोहराते हुए कि सार्थक बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र सही रास्ता है। उन्होंने मुफ्ती मोहम्मद सईद के दृष्टिकोण का जिक्र किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिकायतों को दूर करने, मामलों को सुलझाने और स्थायी शांति की दिशा में काम करने के लिए लोगों से जुड़ना और बातचीत करना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह पहल किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि लोगों खासकर युवाओं की बात सुनने के लिए शुरू की गई है। मौजूदा माहौल में युवा दबाव में, निराश और बंधा हुआ महसूस कर रहे हैं। युवाओं की आवाज सुनना बहुत जरूरी था। अगर पीडीपी उनकी मुश्किलों को कम करने में किसी भी तरह से मदद कर सकती है तो यह सही दिशा में उठाया गया एक कदम होगा।
उन्होंने बताया कि चर्चाओं के दौरान कई तरह की चिंताएं सामने आईं। स्थानीय विकास के मुद्दों और सामाजिक चुनौतियों से लेकर व्यापक दृष्टिकोण तक जिसमें प्रतिभागियों द्वारा साझा किए गए अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार भी शामिल थे।
संयम व सावधानी बरतने की अपील की
मुफ्ती ने गो-रक्षा से जुड़ी घटनाओं पर भी चिंता जताई और संयम व सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने भाजपा से अपील की कि वे ऐसे किसी भी काम से बचें जिससे इस क्षेत्र में शांति और सद्भाव बिगड़ सकता हो। विदेश नीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने वैश्विक संघर्षों में भारत की एक तटस्थ मध्यस्थ के तौर पर भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने सुझाव दिया कि इस्राइल के साथ भारत के संबंध अंतरराष्ट्रीय धारणाओं को प्रभावित कर सकते हैं।