- उच्च न्यायालय ने सेक्शन 20ए(2) के प्रावधान को किया रद्द
- कमेटी के कामकाज पर सीमाएं तय कर मनमानी रोकने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। फीस फिक्सेशन एंड रेगुलेशन कमेटी (एफएफआरसी) हर निजी स्कूल की फीस तय करने वाली मूल्य-नियंत्रण अथॉरिटी नहीं बन सकती। गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को फीस तय करने में काफी स्वायत्तता है। रेगुलेटरी जांच केवल मुनाफाखोरी या व्यावसायीकरण के आरोपों तक सीमित रहेगी। इस टिप्पणी के साथ जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने बुधवार को सेक्शन 20ए(2) को आंशिक रूप से रद्द कर दिया।
हालांकि कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर स्कूल एजुकेशन एक्ट 2002 में किए संशोधनों की सांविधानिक वैधता को बरकरार रखा। ये संशोधन गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की ओर से ली जाने वाली फीस को नियंत्रित करने के लिए किए गए थे। कोर्ट ने एफएफआरसी के कामकाज पर सख्त सीमाएं तय कीं और मनमानी रोकने के निर्देश दिए।
गैर सहायता प्राप्त स्कूलों ने दायर याचिकाओं में वर्ष 2020 के एसओ 3466(ई) और 2022 के जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल्स (फिक्सेशन, डिटर्मिनेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फी) रूल्स को चुनौती दी थी। स्कूलों का तर्क था कि ये प्रावधान और एफएफआरसी की कार्यप्रणाली सुप्रीम कोर्ट के टीएमए पाई फाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य मामले में मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों की स्वायत्तता का उल्लंघन करती है। स्कूलों ने आरोप लगाया कि कमेटी बिना संस्थानों के प्रस्ताव के फीस तय कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर और खर्चों की जांच नहीं कर रही। ट्यूशन और ट्रांसपोर्ट फीस पर अनुचित सीमाएं लगा रही है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने टीएमए पाई फाउंडेशन, इस्लामिक एकेडमी ऑफ एजुकेशन और पीए इनामदार जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की विस्तृत जांच की। कोर्ट ने कहा कि एक्ट के सेक्शन 20ए से 20जे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) का उल्लंघन नहीं करते क्योंकि इनका उद्देश्य शिक्षा में व्यावसायीकरण और मुनाफाखोरी रोकना है।
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सेक्शन 20ए(2) रद्द करने का असर
- सेक्शन 20ए(2) में सेवानिवृत्त वित्तायुक्त या वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को एफएफआरसी का चेयरपर्सन बनाने की अनुमति थी। हाईकोर्ट ने एफएफआरसी को ट्रांसपोर्ट और कंज्यूमर अफेयर्स विभागों वाली कमेटी गठित कर ईंधन मूल्य आदि से जुड़े वैज्ञानिक दिशानिर्देश बनाने के निर्देश दिए।
- कोर्ट ने सभी 5,000 से अधिक निजी संस्थानों पर जांच की आलोचना की। कहा कि यह व्यावहारिक नहीं है। फीस संरचना की जांच व्यक्तिगत रूप से होनी चाहिए। इसमें स्थान, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और भविष्य की विस्तार योजनाएं ध्यान में रखी जाएं।
-कोर्ट ने प्रदेश सरकार से फीस फिक्सेशन रूल्स, 2022 की समीक्षा करने और स्पष्ट पैरामीटर तय करने की अपील की ताकि एक समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों पर अनावश्यक हस्तक्षेप न हो। फैसले में कहा गया कि मुनाफाखोरी रोकनी चाहिए लेकिन गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल उचित सरप्लस और निवेश पर रिटर्न कमा सकते हैं। उन्हें नो-प्रॉफिट, नो-लॉस आधार पर नहीं चलाया जा सकता।
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प्रदेश सरकार को फीस फिक्सेशन रेगुलेशंस पर नए सिरे से विचार करने के लिए कहा
हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की कि फीस फिक्सेशन रेगुलेशंस, 2022 पर नए सिरे से विचार करें। एक समान मापदंड अपनाया जाए, अत्यधिक मुनाफाखोरी पर लगाम लगे और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं द्वारा स्थापित स्कूल अनुचित हस्तक्षेप से प्रभावित न हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफएफआरसी के क्षेत्राधिकार में आने वाले मामलों में अन्य राज्य व केंद्र शासित प्रदेश अथॉरिटीज का हस्तक्षेप पूरी तरह बाहर रहेगा। फीस अधिक वसूली की शिकायतें केवल एफएफआरसी ही संज्ञान ले। यह फैसला निजी स्कूलों की स्वायत्तता और शिक्षा में व्यावसायीकरण रोकने के बीच संतुलन स्थापित करता है।