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Srinagar News: हाईकोर्ट ने पीएसए के तहत दो हिरासत कीं रद्द

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संवाद न्यूज एजेंसी
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श्रीनगर। जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने वीरवार को दक्षिण कश्मीर के दो लोगों की पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत की गई प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की ओर से प्रक्रिया में गंभीर खामियों के कारण हिरासत की प्रक्रिया खराब हो गई और हिरासत में लिए गए लोगों को मिले सांविधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन हुआ।

जस्टिस राहुल भारती की बेंच ने पुलवामा के आसिफ अहमद डार और अनंतनाग के आमिर वानी के खिलाफ हिरासत के आदेशों को रद्द कर दिया और उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया। आसिफ अहमद डार के मामले में, जिन पर पिछले साल 30 अप्रैल को पीएसए के तहत मामला दर्ज किया गया था, कोर्ट ने पाया कि हिरासत के आदेश में उन्हें सरकार और हिरासत लेने वाले अधिकारी दोनों के सामने अपनी बात रखने (रिप्रेजेंटेशन) के अधिकार के बारे में बताया गया था लेकिन पुलिस की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में उन्हें केवल सरकार से संपर्क करने के अधिकार के बारे में बताया गया, जिससे उन्हें एक अहम संवैधानिक सुरक्षा उपाय से वंचित कर दिया गया।
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आमिर वानी के मामले में भी कोर्ट ने माना कि उनकी प्रिवेंटिव डिटेंशन की प्रक्रिया के दौरान अनिवार्य प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया जिससे हिरासत कानूनी रूप से टिक नहीं सकती।

कोर्ट ने कहा कि पिछले साल 5 अगस्त को जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन का आदेश, जो सीधे तौर पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करता है उसे सांविधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करना चाहिए। इन अनिवार्य आवश्यकताओं से कोई भी विचलन हिरासत की बुनियाद पर ही चोट करता है और कानून की नतर में टिक नहीं सकता।

कोर्ट ने आगे कहा कि प्रक्रिया में ऐसी कमियां अक्सर हिरासत के रिकॉर्ड की न्यायिक जांच के बाद ही सामने आती हैं, क्योंकि हिरासत में लिए गए व्यक्ति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे पता हो कि सरकारी फाइलों में क्या हो रहा है।
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दोनों मामलों में संवैधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन होने की बात मानते हुए हाईकोर्ट ने हिरासत के आदेशों और उससे जुड़े सभी सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया और जेल अधिकारियों को दोनों को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।
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