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विशेष आवश्यकता वाले छात्रों व कर्मचारियों के लिए रैंप अनिवार्य करें : कैट

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- सभी संस्थानों में सुविधा के लिए शिक्षा विभाग को दिए निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) श्रीनगर ने स्कूल शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिया है कि उसके अधीन आने वाली हर संस्था में विशेष आवश्यकता वाले छात्रों तथा कर्मचारियों की सुगमता के लिए रैंप की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में दिया गया है।
न्यायिक सदस्य एम एस लतीफ की पीठ ने यह निर्देश एक विशेष रूप से सक्षम लेक्चरर की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। याचिकाकर्ता को ऐसे स्कूल में ट्रांसफर कर दिया गया था जहां रैंप की सुविधा नहीं थी जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों व सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया।
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याचिकाकर्ता अल्ताफ अहमद डार, जो स्कूल शिक्षा विभाग में पर्यावरण विज्ञान के लेक्चरर हैं, ने 27 मई के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें बीएचएसएस हजरतबल, श्रीनगर से बीएचएसएस तैलबल ट्रांसफर किया गया था। उनका कहना है कि उनके दोनों निचले अंगों में 70 प्रतिशत से अधिक लोकोमोटर विकलांगता है।
जम्मू-कश्मीर के सामान्य प्रशासन विभाग ने भी 20 फरवरी 2024 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर सभी प्रशासनिक सचिवों को सूचना व सख्त अनुपालन के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता ने बताया कि बैसाखी के सहारे बीएचएसएस तैलबल जाना उनके लिए गंभीर शारीरिक कष्ट का कारण बनता है। साथ ही, वहां पर्यावरण विज्ञान का कोई छात्र नहीं है, जिससे वे संस्थान में निष्क्रिय रहेंगे।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष मई में दी गई उनकी शिकायत पर स्कूल शिक्षा निदेशालय कश्मीर ने कोई विचार नहीं किया जिसके कारण उन्हें जम्मू-कश्मीर विकलांगता आयुक्त के पास जाना पड़ा। आयुक्त ने उनकी शिकायत को जम्मू-कश्मीर विकलांगता अधिकार नियम 2021 के तहत ग्रिवांस मानते हुए निदेशक से जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। याचिका के जवाब में न्यायाधिकरण ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी को याचिकाकर्ता के मामले पर गुण-दोष के आधार पर विचार करना चाहिए था और प्रतिवेदन का सामान्य रूप से निपटारा करना चाहिए था।

ट्रिब्यूनल ने कहा, ट्रांसफर की गई स्कूल में भारत सरकार के समय-समय पर जारी आदेशों तथा विकलांगता से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के पूर्ण पीठ फैसले के अनुपालन की अनिवार्यता थी। ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी की कि प्राधिकारी शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी अनिवार्य आवश्यकताओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जहां विशेष आवश्यकता वाले बच्चे पढ़ते हैं। यह समझ से परे है कि यदि ट्रांसफर वाली स्कूल में कोई विशेष आवश्यकता वाला बच्चा हो तो बिना आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के वह अपनी जरूरतों का कैसे सामना करेगा।
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न्यायिक सदस्य ने कहा, अच्छी शिक्षा में शैक्षणिक संस्थान का उत्तम वातावरण और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे या कर्मचारी के लिए पहुंच आवश्यक है। मैं प्राधिकारियों को विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने का इच्छुक हूं, क्योंकि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुरूप होगा। अदालत ने याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसे सहायक महाधिवक्ता सतिंदर सिंह ने स्वीकार किया और उन्हें विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया।
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