शोपियां । शोपियां के वर्षों पुराने पारंपरिक शुक्रवार बाजार के बंद होने से सैकड़ों फेरीवालों और छोटे व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है। हर महीने के अंतिम शुक्रवार को जामिया मस्जिद शोपियां परिसर में लगने वाला यह बाजार दक्षिण कश्मीर के व्यापारिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था।
वर्षों से यह बाजार छोटे व्यापारियों के लिए कपड़े, घरेलू सामान, खाद्य पदार्थ और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बेचने का प्रमुख मंच रहा है। शोपियां के अलावा कुलगाम, पुलवामा और श्रीनगर सहित आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में खरीदार और विक्रेता यहां पहुंचते थे।
स्थानीय व्यापारी यासिर अहमद ने बताया कि इस बाजार से 300 से अधिक फेरीवाले अपनी आजीविका चलाते थे। उनके अनुसार, सीमित संसाधनों वाले व्यापारियों के लिए यह मासिक बाजार अपने परिवारों का पालन-पोषण करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम था।
यासिर ने कहा कि फेरी लगाने का व्यवसाय उनके परिवार की कई पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है। उनके दादा, परदादा और पिता भी इसी पेशे से जुड़े रहे हैं। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने भी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह बाजार अनेक परिवारों की आर्थिक रीढ़ बना हुआ था।
व्यापारियों का कहना है कि शोपियां ऐतिहासिक रूप से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है और शुक्रवार बाजार ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। बाजार के बंद होने से उनकी आय प्रभावित हुई है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
विक्रेताओं के अनुसार, हाल ही में नगर समिति द्वारा जारी घोषणाओं में पारंपरिक बाजार क्षेत्र में दुकानें लगाने पर रोक लगाने और आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई तथा जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई है।
इस संबंध में नगर समिति शोपियां के कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि प्रशासन एक व्यवस्थित रविवार बाजार स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों और विक्रेता संगठनों को निर्धारित स्थान उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे बेहतर प्रबंधन और नियमन के साथ अपना कारोबार जारी रख सकें।
हालांकि पारंपरिक शुक्रवार बाजार के बंद होने से व्यापारियों में चिंता व्याप्त है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि प्रस्तावित रविवार बाजार उनकी आजीविका को सुरक्षित रखने और छोटे व्यापार को नई दिशा देने में मददगार साबित होगा।