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Srinagar News: एडीसी बनकर परिवार से की 28 लाख की धोखाधड़ी, कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पुलवामा। पुलिस ने एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उस पर एडीसी पुलवामा बनकर भूमि मुआवजा विवाद के संबंध में एक पिता-पुत्र से लगभग 28 लाख की धोखाधड़ी करने का आरोप है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पुलवामा की अदालत के निर्देशों के बाद की गई।
पुलिस के अनुसार कचाचकूट अवंतिपोरा निवासी हारून रशीद बांध के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला सीजेएम मुजम्मिल अहमद वानी ने 23 अक्तूबर को फ्रस्ताबल पांपोर निवासी मुहम्मद यूसुफ ठोकर और उनके बेटे तारिक अहमद ठोकर द्वारा दायर एक आवेदन पर जारी आदेश के बाद का है। शिकायत के अनुसार आवेदकों ने आरोप लगाया कि बांध ने झूठा रूप से खुद को एडीसी पुलवामा के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि न तो वह उस आधिकारिक पद पर था और न ही उसे उस पद का प्रयोग करने के लिए अधिकृत किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उसने भूमि मुआवजे और संपत्ति लेनदेन से जुड़े अभ्यावेदन के माध्यम से उन्हें लगभग 28 लाख देने के लिए प्रेरित करने के लिए कथित आधिकारिक पहचान का इस्तेमाल किया।
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शिकायत में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-444 के निर्माण या चौड़ीकरण के संबंध में पुलवामा के गुडूरा में मोहम्मद यूसुफ ठोकर की भूमि का एक हिस्सा अधिग्रहित किया गया था, जिसके लिए मुआवजा देय हो गया था। आवेदन के अनुसार, आरोपी अधिग्रहण और मुआवजे से संबंधित कार्यवाही के दौरान परिवार के संपर्क में आया और बाद में धोखाधड़ी वाले अभ्यावेदन के माध्यम से पैसे प्राप्त किए।
कोर्ट के आदेश में गुडूरा में शेष भूमि से संबंधित 10 जून, 2026 की बिक्री के एक समझौते का भी उल्लेख है। आवेदकों ने आरोप लगाया कि बाद में उन्हें कथित गलत बयानी का पता चला और उन्होंने 4 जुलाई, 2026 को दायर एक दीवानी मुकदमे का उल्लेख किया, जो मुंसिफ, पुलवामा की अदालत में लंबित था। आवेदकों ने अदालत को बताया कि उन्होंने पुलिस स्टेशन पुलवामा और एसएसपी पुलवामा से एफआईआर दर्ज करने के लिए संपर्क किया था, लेकिन कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, जिसके बाद उन्होंने बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की।
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अपने 23 अक्टूबर के आदेश में, सीजेएम ने कहा कि पुलिस ने ऐसा करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद कोई रिपोर्ट या जवाब प्रस्तुत नहीं किया था। अदालत ने आवेदन, हलफनामा, लेनदेन से संबंधित सामग्री और आवेदकों द्वारा संदर्भित व्हाट्सएप वार्तालापों की जांच की और कहा कि सामग्री प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराधों का खुलासा करती है जिसके लिए गहन जांच की आवश्यकता है। अदालत ने परिणामस्वरूप स्टेशन हाउस ऑफिसर, पुलिस स्टेशन पुलवामा को कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने और जांच के साथ आगे बढ़ने का निर्देश दिया।
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