जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने भले ही खुले बाजार में आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली 25 किताबों की बिक्री पर प्रतिबंधि लगा दिया है लेकिन ऑनलाइन मार्केट में ये धड़ल्ले से बिक रही हैं। अमेरिका की एक ई-कामर्स कंपनी के साथ ही कई अन्य ऑनलाइन मार्केटिंग वेबसाइट और बुक कंपनियों पर यह सभी किताबें उपलब्ध हैं। वह भी डिस्काउंट के साथ। कई किताबें तो आउट ऑफ स्टॉक हैं।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर गृह विभाग ने पिछले दिनों देश-विदेश में कश्मीर के संबंध में दुष्प्रचार करने और युवाओं व कश्मीरियों को भ्रमित करने वाली 25 किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया। ये सभी किताबें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, अलगाववाद और जम्मू-कश्मीर के बारे में भारत के वैधानिक दावे को नकारने तथा बगावत की भावना पैदा करने वाली थीं। प्रतिबंधित के बाद अब इन किताबों को प्रदेश में न कोई खरीद सकता है न ही इसका प्रचार-प्रसार कर सकता है।
आदेश के क्रम में पुलिस ने इन पुस्तकों को जब्त करना शुरू कर दिया है। प्रकाशक और विक्रेताओं के यहां तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि जिन्होंने इन किताबों को रखा है जल्द पुलिस के पास जमा करा दें। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। वहीं इससे इतर ऑनलाइन मार्केट में प्रतिबंधित पुस्तकों का भंडार पड़ा है। ई-कामर्स कंपनियां 8 से 25% डिस्काउंट पर एक सप्ताह के अंदर श्रीनगर में इसकी डिलीवरी का दावा कर रही हैं। इसमें भी आपत्तिजनक पुस्तकों को पढ़ने वालों ने 5 स्टार दे रखी है लेकिन अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है।
ऑनलाइन मार्केट में उपलब्ध हैं ये किताबें
ह्यूमन राइट्स वायलेशन इन कश्मीर डिस्काउंट के साथ 1369 रुपये में, डू यू रिमेंबर कुननपोशपोरा 415 रुपये में, इंडिपेंडेंट कश्मीर 2702 रुपये, कश्मीर इन कनफ्लिक्ट (इंडिया, पाकिस्तान एंड द अनएंडिंग वार) 3064 रुपये, इंडिपेंडेंट कश्मीर 2702 रुपये, लाॅ एंड कनफ्लिक्ट रिजाॅल्यूशन इन कश्मीर 1293 में, तारीख ए सियासत कश्मीर और कश्मीर एंड द फ्यूचर ऑफ साउथ एशिया 5998 रुपये, द कश्मीर डिस्प्यूट 1947-2002, 444 रुपये में और कश्मीर पाॅलिटिक्स एंड प्लेबिसाइट आदि उपलब्ध हैं।
‘मुजाहिद की अजान’ छपी रामपुर में और सहयोग मिला आजमगढ़ से
मोहम्मद इनायतुल्लाह लिखित पुस्तक मुजाहिद की अजान पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इस पुस्तक के बारे में जानकार हैरानी होगी। जम्मू-कश्मीर के बारे में लिखी गई यह पुस्तक उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला में स्थित मक्तबा अल हसनात द्वारा प्रकाशित की गई है जिसमें यूपी के ही आजमगढ़ जिले के दारुल मुसन्निफ़ीन शिबली अकादमी ने सहयोग किया है। इसके अलावा लेखिका अरुंधति रॉय व अन्य द्वारा लिखित पुस्तक आजादी और अनुराधा भसीन जम्वाल की ए डिसमेंटल स्टेट (द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कश्मीर ऑफ्टर आर्टिकल 370) को भी प्रतिबंधित किया गया है लेकिन ऑनलाइन वेबसाइट पर सहज उपलब्ध हैं।
सैयद अबुल आला मौदूदी की एक उत्कृष्ट कृति का अंग्रेजी अनुवाद। यह पुस्तक न केवल युद्ध (जिहाद) पर इस्लामी दृष्टिकोण से संबंधित है, बल्कि यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म जैसे विभिन्न धर्मशास्त्रों में न्यायपूर्ण युद्ध की अवधारणा का तुलनात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत करती है। अल जिहाद फिल इस्लाम - अमेजन पर 449 रुपये में उपलब्ध है।
कश्मीर (द केस फॉर फ्रीडम) - अरुंधति रॉय व अन्य द्वारा लिखित 512 रुपये में अमेजन पर है।