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जम्मू-कश्मीर: यासीन मलिक समेत सात पर पीएमएलए के तहत चलेगा केस, 30 अक्तूबर को अगली सुनवाई

Fri, 02 Oct 2026 10:48 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

दिल्ली की विशेष अदालत ने यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है।
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यासीन मलिक (फाइल फोटो) - फोटो : X @ANI
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विस्तार
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दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत ने प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जिससे उन पर मजबूत संदेह पैदा होता है। इन सभी पर जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने और अलगाववाद को हवा देने के लिए हवाला के जरिये पाकिस्तान से धन मंगाने का आरोप है।

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विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 9 सितंबर के आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत प्रथम दृष्टया सभी सात आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए की धारा 3 और 4 के तहत आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। आरोपियों में यासीन मलिक, जहूर अहमद शाह वटाली, इंजीनियर रशीद (लोकसभा सदस्य), शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट और ट्रिसन फ्रम्स एंड कंस्ट्रक्शन शामिल हैं। कोर्ट ने औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की थी। सुरक्षा कारणों से आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश नहीं किया गया। मामले में अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी। ईडी का यह मामला एनआईए की ओर से 2017 में दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है। इसमें एनआईए ने आरोपियों पर आईपीसी के तहत यूएपीए समेत कई धाराएं लगाई थीं।

वहीं, ईडी के मुताबिक, आरोपियों ने पाकिस्तानी एजेंसियों और आतंकी संगठनों से हवाला व कैश कूरियर के जरिये 8.94 करोड़ से अधिक की रकम जुटाई। जांच में सामने आया कि नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग से भी धन इकट्ठा कर हुर्रियत नेतृत्व तक पहुंचाया गया। इसका इस्तेमाल अलगाववादी एजेंडा फैलाने और विध्वंसक गतिविधियों में किया गया।
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टेरर फंडिंग में पहले से उम्रकैद काट रहा मलिक
एनआईए की ओर से 2017 में दर्ज किए गए टेरर फंडिंग मामले में पटियाला हाउस की विशेष अदालत ने मई 2022 में यासीन मलिक को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मलिक पर पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-ताइबाए हिजबुल मुजाहिदीन और आईएसआई से धन जुटाकर पत्थरबाजी, हड़ताल और हिंसा भड़काने का दोष साबित हुआ था। एनआईए ने उसकी सजा को फांसी में बदलने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर कर रखी है। वर्तमान में मलिक दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

यासीन मलिक का 90 के दशक के आतंकवाद से गहरा नाता है। कश्मीरी पंडितों के विस्थापन, नृशंस हत्याओं और सुरक्षा बलों पर हमलों में वह सीधे तौर पर शामिल रहा है। अप्रैल 1990 में जेकेएलएफ ने मुखबिरी के झूठे आरोप में श्रीनगर से 27 वर्षीय कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट का अपहरण किया। अमानवीय यातनाएं देकर 19 अप्रैल को उनकी हत्या कर दी गई। जांच एजेंसियों व चश्मदीदों ने मलिक की इसमें संलिप्तता की पुष्टि की है।

वायुसेना के चार जवानों की हत्या
25 जनवरी 1990 को रावलपोरा में जेकेएलएफ ने निहत्थे वायुसेना जवानों पर फायरिंग की। इसमें स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित 4 जवान शहीद और 40 से अधिक घायल हुए। चश्मदीदों ने कोर्ट में मलिक को मुख्य शूटर बताया था।

रुबिया सईद अपहरण
दिसंबर 1989 में 5 आतंकियों की रिहाई के लिए तत्कालीन गृह मंत्री की बेटी रुबिया सईद का अपहरण किया गया। इस साजिश का मुख्य सूत्रधार भी मलिक ही था, जिसे टाडा कोर्ट में रुबिया ने अपने अपहरणकर्ता के रूप में पहचाना है। 
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