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कामयाबी: शोपियां में रात भर चली मुठभेड़ में लश्कर के चार आतंकी ढेर, सरेंडर की अपील भी काम न आई

Tue, 23 Mar 2021 06:01 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर

सार

-आतंकी की बीवी व चार साल के बच्चे को बुलाकर सरेंडर की अपील भी काम न आई
-मारे गए आतंकियों से एक एके 47 व तीन पिस्टल बरामद, इस साल दो टॉप कमांडर समेत 19 आतंकी ढेर
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इसी घर में छिपे थे चारों आतंकी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में सुरक्षा बलों ने रातभर चली मुठभेड़ में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के चार आतंकियों को मार गिराया। यह इस साल का सबसे बड़ा ऑपरेशन है जिसमें एक साथ चार दहशतगर्दों का काम तमाम किया गया। मुठभेड़ में सेना का एक जवान भी घायल हुआ है। आईजी कश्मीर विजय कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह बड़ी कामयाबी है। इस वर्ष घाटी में विभिन्न मुठभेड़ों में दो टॉप कमांडरों समेत 19 आतंकियों को मार गिराने में सफलता हाथ लगी है। मारे गए आतंकियों से एक एके 47 व तीन पिस्टल बरामद किए गए हैं। 

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रविवार देर रात करीब 2 बजे सुरक्षाबलों  को जिले के इमाम साहिब इलाके के मनिहाल गांव में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके आधार पर सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस ने साझा तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एक मकान में छिपे आतंकियों को घेर लिया गया। रात का समय होने के बावजूद सुरक्षाबलों ने बार-बार सरेंडर करने की आतंकियों से अपील की लेकिन वह नहीं माने। 

आईजी ने बताया कि आतंकियों के परिवार वालों को बुलाया गया। एक आतंकी की बीवी अपने चार साल के बच्चे के साथ पहुंची थी। उनकी अपील का भी आतंकियों पर असर नहीं हुआ। जैसे ही सुरक्षाबलों ने घर को घेरे में लिया तो मकान में छुपे आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। इसका जवानों ने जवाब दिया तो मुठभेड़ शुरू हो गई। शुरुआती फायरिंग में सेना का एक जवान घायल हो गया, जिसे मौके से निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। ऑपरेशन में चार आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षाबलों द्वारा सख्ती से जमीनी स्तर पर एसओपी का पालन किया जा रहा है और आतंकियों को सरेंडर करने का मौका दिया जाता है। सुरक्षाबलों द्वारा पेशेवर तरीके से आतंक विरोधी ऑपरेशन अंजाम दिए जा रहे हैं। अभी तक अंजाम दिए गए इन ऑपरेशनों के दौरान किसी भी सिविलियन की जान नहीं गई। हमारे चार जवान शहीद हो गए जिनमें एक सेना और एक पुलिस का जवान बड़गाम में और दो पुलिस के जवान श्रीनगर हमले में मारे गए।
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एक महीने में ही मारा गया आमिर 

आईजीपी ने बताया कि कुछ खबरें आ रही थीं कि मारे गए आतंकी टीआरएफ से हैं लेकिन हमारे लिए टीआरएफ और लश्कर-ए-मुस्तफा झूठे नाम हैं जबकि यह दोनों संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद की शाखाएं हैं। मारे गए आतंकी लश्कर से संबंधित थे। इनकी शिनाख्त रईस अहमद (पिछले वर्ष अक्तूबर से सक्रिय), आमिर मीर (इस वर्ष फरवरी से सक्रिय) आकिब मलिक (पिछले वर्ष दिसंबर से सक्रिय) और आफ ताब वानी (पिछले वर्ष नवंबर से सक्रिय) के तौर पर हुई है।

इस साल 18 युवाओं ने थामा बंदूक
आईजीपी ने बताया कि इस वर्ष अभी तक कुल 9 मुठभेड़ें हुई हैं जिनमें से एक उत्तरी कश्मीर और शेष दक्षिणी कश्मीर में हुई हैं। अब तक हुई इन मुठभेड़ों में कुल 19 आतंकियों को मार गिराया गया जिनमें से 9 को शोपियां में ही मार गिराया गया है। इन आतंकियों में से दो टॉप कमांडर उत्तरी कश्मीर का गनी ख्वाजा (अल-बद्र प्रमुख) और दक्षिण कश्मीर का सज्जाद अफगानी (जैश सरगना) शामिल हैं। अभी तक 18 स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हुए हैं जिनमें से 5 को मार गिराया गया है। तीन को गिरफ्तार किया गया जबकि बाकी के अभी भी सक्रिय हैं। जो सक्रिय हैं उनके अभिभावकों और करीबी रिश्तेदारों से संपर्क कर उनके बच्चों को मुख्यधारा में शामिल कराने की कोशिश जारी है।  
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आतंकी आकिब को बाकी के साथियों ने नहीं करने दिया सरेंडर

ऑपरेशन के बाद सेना की दक्षिणी कश्मीर में कमान संभालने वाले विक्टर फोर्स के जीओसी मेजर जनरल रश्मि बाली ने बताया कि सेना की 44 आरआर ने आतंकी आकिब की बीवी और 4 साल के बच्चे को मुठभेड़ स्थल पर लाकर समर्पण की अपील कराई। उन्हें पता चला है कि आकिब सरेंडर करना चाह रहा था लेकिन बाकी के आतंकियों ने उसे ऐसा नहीं करने दिया। जीओसी ने उसके साले को भी अपील के लिए बुलाया गया लेकिन उसने सरेंडर नहीं किया। अगर वह करता तो शायद हम उसे बचा पाते। रविवार देर रात से सोमवार तड़के तक ऑपरेशन को टाला गया ताकि सरेंडर सफल हो सके लेकिन जब अंदर से फायर तेज हुआ तो कोई चारा नहीं बचा। 

आतंकी को कवर कर समर्पण के लिए लाने की कोशिश में घायल हुआ जवान
जीओसी ने कहा कि यदि कोई भी स्थानीय आतंकी सरेंडर करना चाहता है तो हम अपनी जान की परवाह न करते हुए भी आखिरी वक्त तक समर्पण कराने की कोशिश करेंगे। 34 आरआर का जो जवान गोली लगने से घायल हुआ उसके पीछे भी कारण यही था। वह कवर लेकर आतंकी को लाने की कोशिश कर रहा था। कई युवा कई तरीकों से वापस लौटने के लिए संदेश भेजते हैं लेकिन कुछ रिंग लीडर्स के चलते ऐसा नहीं कर पाते। सुरक्षाबल हमेशा उनका सहयोग करेगी।
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