वांगचुक ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी देते हुए उम्मीद जताई कि प्रशासन महिलाओं के भरोसे और विश्वास का सम्मान करेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सभी मांगें मानने पर सहमति जताई है और समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।
लद्दाख में नई शराब नीति के विरोध में पिछले सप्ताह से महिलाओं का आंदोलन चल रहा था। महिला संगठन शराब नीति को पूरी तरह वापस लेने और लद्दाख को पूर्ण रूप से शराबमुक्त केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन में लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन महिला विंग, अंजुमन-ए-इमामिया महिला विंग, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम महिला विंग और ईसाई समुदाय महिला विंग शामिल थे।
इन संगठनों ने शराब की उपलब्धता बढ़ाने हाल ही में बार लाइसेंस जारी करने और नई वाइन शॉप खोलने को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि शराब की बढ़ती उपलब्धता से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है और लद्दाख की सामाजिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पहचान को नुकसान पहुंच सकता है।
प्रशासन के गृह विभाग की ओर से 29 अक्तूबर को जारी पत्र में विशेष सचिव ताशी डोलमा ने संगठनों की ओर से दिए गए सुझावों और मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार करने की बात कही। इसके बाद प्रशासन ने आपसी बातचीत और सहयोग के आधार पर एक सप्ताह में समझौते को अंतिम रूप देने का समय मांगा।
महिला संगठनों ने कहा कि उन्होंने प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए धरना अस्थायी रूप से स्थगित किया है, ताकि प्रशासन अपने वादे को पूरा कर सके और सहमत बिंदुओं को लिखित रूप दे सके। संगठनों ने आंदोलन को समर्थन देने के लिए लद्दाख के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि वे स्वस्थ और नशामुक्त लद्दाख के अपने संकल्प पर कायम हैं।