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अलगाववादियों के मुंह पर तमाचा, कबाइली हमले की वर्षगांठ पर श्रीनगर में लगे ब्लैक डे के होर्डिंग

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बदलाव की बयार का असर नजर आ रहा है। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में पिछले 70 सालों के दौरान पहली बार सड़कों के किनारे 22 अक्तूबर को काला दिवस (ब्लैक डे) लिखे होर्डिंग नजर आए। यह अलगाववादियों के मुंह पर करारा तमाचा है। इसे 73 वर्ष पहले 22 अकतूबर 1947 को हुए हुए कबाइलियों के हमले की घटना के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
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बताया जाता है कि यह होर्डिग मंगलवार रात लगाए गए थे और बुधवार की सुबह जिस किसी ने भी देखा वो हैरान रह गया। इन पोस्टरों को देख कर शुरू हुई गहमा गहमी के चलते कई जगहों से इन पोस्टरों को आनन फानन मेें हटा दिया गया। सूत्रों का कहना है कि इन होर्डिगों को श्रीनगर नगर निगम से अनुमति के बाद बटवारा, डलगेट, बटमालू, जहांगीर चौक आदि इलाकों में लगाया गया था।
इन होर्डिंग्स पर लिखा था कि 22 अक्तूबर को पाकिस्तान ने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत पर हमला किया था। यह पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर के महाराजा के साथ किए गए समझौते का उल्लंघन था। इन होर्डिंगों पर यह भी लिखा था कि क्या आप लोग जानते हैं कि 22 अक्तूबर 1947 क्या है ? यह दिन जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए ब्लैक डे है। होर्डिगों में इसे लगाने वाली संस्था के रूप में सेंटर फॉर इंक्लूसिव एंड ससटेनेबल डेवलपमेंट्स का नाम अंकित था। गौरतलब है कि इस होर्डिंग में कश्मीर के अवाम को कबाइली हमले (22 अक्तूबर) के दिन को ब्लैक-डे के तौर पर स्वीकार करने को कहा गया था।
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अलगाववादी 27 को मनाते हैं ब्लैक डे
पुलिस सूत्रों के अनुसार, होर्डिंग किसने लगवाए इसकी कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अलगवादी 27 अक्तूबर को काला दिवस के रूप में मनाते हैं। जिस दिन भारतीय सेना कश्मीर में उतरी थी।
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