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Srinagar News: वॉयस ऑफ बुद्धिस्ट लद्दाख’ का गठन, बौद्ध एसोसिएशन को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत करेगा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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लेह। लद्दाख के सभी क्षेत्रों से वरिष्ठ बौद्ध नेताओं, युवाओं और महिलाओं ने लेह में वॉयस ऑफ बुद्धिस्ट लद्दाख नए सामूहिक मंच का गठन किया। इस नवगठित संस्था का उद्देश्य बौद्ध समुदाय की चिंताओं और आकांक्षाओं को सीधे गृह मंत्रालय और भारत सरकार तक पहुंचाना है।
अचिनाथांग के स्कर्मा नामटाक को सर्वसम्मति से वॉयस ऑफ बुद्धिस्ट लद्दाख का संयोजक चुना गया। वे बौद्ध समुदाय से जुड़े मुद्दों पर चल रहे संवाद के दौरान लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन, लेह एपेक्स बॉडी, हाई पावर्ड कमेटी, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन तथा गृह मंत्रालय के साथ समन्वय और संपर्क की भूमिका निभाएंगे।
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वर्ष 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद से भूमि, संस्कृति, पर्यावरण की सुरक्षा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों तथा शासन व्यवस्था में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर लोगों में चिंताएं बढ़ती रही हैं। इन आशंकाओं के समाधान के लिए लद्दाख के विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया ताकि गृह मंत्रालय के साथ संवाद किया जा सके। हालांकि, हाई पावर्ड कमेटी में बौद्ध समुदाय के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। इसी पृष्ठभूमि में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस द्वारा संयुक्त रूप से तैयार हालिया मसौदा प्रस्ताव को बौद्ध समुदाय के कुछ वर्गों द्वारा उनके हितों को कमजोर करने वाला माना गया है।

संस्था के संस्थापकों के अनुसार वॉयस ऑफ बुद्धिस्ट लद्दाख का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लद्दाख के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच चल रहे संवाद से निकलने वाले किसी भी निर्णय में बौद्ध समुदाय की आवाज और हितों को उचित रूप से प्रतिबिंबित किया जाए। यह मंच एक प्रतिनिधि संस्था के रूप में कार्य करेगा, ताकि लद्दाख से संबंधित भविष्य की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में समावेशिता और संतुलित सामुदायिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
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वॉयस ऑफ बुद्धिस्ट लद्दाख का गठन इस बात को दर्शाता है कि वर्ष 2019 के बाद केंद्र शासित प्रदेश बने लद्दाख में पहचान, अधिकारों और प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक विमर्श लगातार विकसित हो रहा है। यह मंच लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन को कमजोर नहीं बल्कि और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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