- संबंधित विभागों को पूरे स्थल का व्यापक कायाकल्प करने के दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख के उपराज्यपाल ने मंगलवार को लेह स्थित सिंधु घाट का दौरा किया। उन्होंने आयोजित किए जाने वाले पहले सिंधु महाकुंभ की जमीनी तैयारियां परखीं। लेह में यह महाकुंभ 22 से 27 जून तक चलेगा जो सिंधु दर्शन महोत्सव के 30 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है।
उपराज्यपाल ने इस आयोजन को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक समागम बताते हुए कहा कि इसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और आगंतुकों के आने की उम्मीद है। उन्होंने आयोजन से पहले सिंधु घाट को सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान एलजी ने संबंधित विभागों को पूरे स्थल का व्यापक कायाकल्प करने के निर्देश दिए। इसमें मलबा और अवैध संरचनाओं को हटाना, घाट की संरचना की आवश्यक मरम्मत करना तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तटबंध और नदी तट को मजबूत करना शामिल है।
अधिकारियों को नदी किनारे सौंदर्यीकरण कार्य करने के लिए भी कहा गया जिसमें व्यवस्थित पाथवे का निर्माण, बैठने की उचित व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के लिए नियंत्रित प्रवेश बिंदु विकसित करना शामिल है। उपराज्यपाल ने सिंधु घाट तक जाने वाले संपर्क मार्ग को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए। झाड़ियों की कटाई-छंटाई, उचित फुटपाथ निर्माण, स्ट्रीट लाइटिंग में सुधार तथा सार्वजनिक सुविधाओं जैसे शौचालय, पेयजल केंद्र और सूचना कियोस्क स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने पर्याप्त कूड़ेदान लगाने और सफाई कर्मचारियों की तैनाती सहित प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा ताकि आयोजन से पहले, दौरान और बाद में स्थल स्वच्छ बना रहे। उपराज्यपाल ने सभी कार्यों की समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए नियमित फील्ड निरीक्षण और प्रगति समीक्षा के साथ एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करने पर भी बल दिया।
उन्होंने लद्दाख की विशिष्ट सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए ऐसी किसी भी निर्माण या सौंदर्यीकरण गतिविधि से बचने की हिदायत दी जो नदी तट की प्राकृतिक सुंदरता या स्थानीय पारिस्थितिकी को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य पहले सिंधु महाकुंभ का आयोजन विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाओं और सुगम आगंतुक अनुभव के साथ करना है। साथ ही क्षेत्र की विशिष्ट पहचान और शांति को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।