शहरी क्षेत्रों में भी छत पर अन्न उगाने की संभावना
जहूर अहमद ने बताया कि यह निर्णय बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण घटती कृषि भूमि को देखते हुए प्रयोग के तौर पर लिया गया। उन्होंने कहा कि हमें हर क्षेत्र में नए तरीके पेश करने होंगे। यह सफलता उन शहरी लोगों के लिए भी प्रेरणा बनेगी जो खेती का शौक रखते हैं लेकिन उनके पास अपनी जमीन नहीं है। इस तकनीक से वह अपने घर की जरूरत के मुताबिक छत पर ही अन्न पैदा कर सकते हैं।
किसी भी रसायन का नहीं किया प्रयोग
रेशी ने बताया कि मिट्टी की सहायता के बिना किसी चीज को उगाने की तकनीक को हाइड्रोपोनिक कहा जाता है। जीव विज्ञान के कारण ही यह संभव हो पाया है। उन्होंने केवल पानी की मदद से ही यह धान उगाया है। इसे उगाने में किसी तरह के रसायन का प्रयोग नहीं किया। उन्होंने अपने साथी किसानों से इसका अनुसरण करने का आग्रह किया। बता दें कि जीआई टैग मिलने के बाद से मुश्क बुडजी किस्म की मांग और मूल्य दोनों ही बढ़े हैं।
क्या है मुश्क बुडजी चावल की खासियत
कश्मीर के मुश्क बुडजी चावल अपनी मनमोहक सुगंध के लिए जाने जाते हैं। मुश्क बुडजी चावल को जीआई टैग भी मिल चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन चावलों की काफी मांग है। इस चावल की कीमत 15 हजार से 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल के बीच होती है।