कश्मीर फाइट ब्लॉग मामले में श्रीनगर में चार पत्रकारों के घर पर दबिश और सामान बरामदगी के बाद उठ रहे प्रताड़ना के आरोपों को आईजीपी कश्मीर ने खारिज किया है। आईजीपी कश्मीर, विजय कुमार ने साफ किया कि पत्रकारों को प्रताड़ित करने जैसी कोई बात नहीं है बल्कि यह एक संवेदनशील मामले को लेकर की जाने वाली कार्रवाई का हिस्सा है।
आईजीपी ने मीडिया बिरादरी को सलाह दी कि वह झूठी खबरें न फैलाए क्योंकि इससे जांच में अनावश्यक बाधा पेश आएगी। पुलिसने बताया कि चारों पत्रकारों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और शाम को जाने की अनुमति दे दी गई थी। उन्हे कल उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। जांच जारी है और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की भी जांच चल रही है।
पुलिस ने बताया कि सुबूतों के आधार पर अदालत से तलाशी वारंट हासिल करने के बाद आठ सितंबर को चार अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान कुछ मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट जब्त किए गए।
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बुधवार सुबह श्रीनगर में चार पत्रकारों के आवासों पर छापे मारे। घरों की तलाशी में कुछ लैपटॉप, मोबाइल फोन, अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस व दस्तावेज कब्जे में लिए। पता चला है कि यह कार्रवाई यूएपीए तथा आईपीसी के तहत पुलिस स्टेशन कोठीबाग में दर्ज कश्मीर
फाइट ब्लॉग मामले के संबंध में की गई।
सूत्रों के अनुसार, एसडीपीओ नेहरू पार्क ने पुलिस टीम के साथ शेख हमजा कॉलोनी लालबाजार निवासी पत्रकार शौकत अहमद मट्टा के आवास पर छापा मारा। वह एक पत्रिका के प्रधान संपादक हैं। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार 2019 से पत्रिका प्रकाशित नहीं हो रही है।
एक अन्य टीम ने अबुबकर कॉलोनी बेमिना निवासी पत्रकार अजहर कादरी के घर छापा मारा। कादरी कई मीडिया संस्थानों के लिए काम करता है। एसपी ईस्ट ने अब्बास शाह और तुर्की की न्यूज एजेंसी टीआरटी वर्ल्ड के लिए काम करने वाले हिलाल मीर के आवास पर भी छापा मारा। हिलाल पहले एक स्थानीय अखबार के लिए भी काम करता था।