कश्मीर घाटी के एकमात्र देखभाल प्रसूति अस्पताल लाल देद (एलडी) में पिछले तीन वर्षों में तीन हजार अधिक बाल शिशुओं (लड़के) ने जन्म लिया। शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में अस्पताल में 34,500 बच्चों (लड़के) का जन्म हुआ, जबकि इसी अवधि में बच्चियों के जन्म का आंकड़ा लगभग 31,500 है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में अस्पताल में जन्म लेने वाले शिशुओं (लड़के) की संख्या 12 हजार थी, जबकि इसी अवधि में करीब 11 हजार बच्चियों ने जन्म लिया। वर्ष 2020-21 में अस्पताल में जन्म लेने वाले शिशुओं (लड़के) की संख्या लगभग 11,000 और बच्चियों की संख्या लगभग 10,000 थी। वर्ष 2021-22 में जन्म लेने वाले शिशुओं (लड़के) की संख्या लगभग 11,500 और बच्चियों की संख्या लगभग 10,500 रही।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफ एचएस) के पांचवें दौर के आंकड़ों से पता चला है कि पिछले पांच वर्षों में जन्म लेने वाले प्रति 1,000 शिशुओं (लड़के) पर लड़कियों के लिंगानुपात में वर्ष 2015-2016 में 923 से वर्ष 2019-2020 में 976 तक वृद्धि हुई है। इससे यह पता चला कि आधी से अधिक आबादी जम्मू-कश्मीर में दो या उससे कम बच्चों को परिवार का आदर्श मानती है।
सर्वे में यह भी पता चला है कि 23 प्रतिशत महिलाएं और 25 प्रतिशत पुरुष बेटियों की तुलना में बेटों को प्राथमिकता देते हैं। केवल 7 प्रतिशत महिलाएं और पुरुष ही बेटों की तुलना में अधिक बेटियां चाहते हैं। हालांकि महिलाओं में 84-87 प्रतिशत और पुरुषों में 87-89 प्रतिशत कम से कम एक बेटा और कम से कम एक बेटी चाहते हैं। इसके अलावा जिन महिलाओं के दो बच्चे हैं और उनमें एक बेटा है, ऐसी 65 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे नहीं चाहती हैं, जबकि दो बेटियों वाली महिलाओं में 38 प्रतिशत और बच्चे नहीं चाहती हैं।