सुप्रीम कोर्ट ने लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी) कारगिल के चुनाव के लिए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से पांच अगस्त को जारी अधिसूचना रद्द कर दिया है। साथ ही चुनाव विभाग को सात दिन के भीतर नई अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है। चुनाव 10 सितंबर को प्रस्तावित था। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) चुनाव के लिए हल चिन्ह का उपयोग करने की हकदार है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से जेकेएनसी को हल चिन्ह आवंटित करने के विरोध में दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। पीठ ने याचिका दायर करने के लिए लद्दाख प्रशासन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। लद्दाख प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के नौ अगस्त के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने लद्दाख प्रशासन को परिषद चुनावों के उद्देश्य से जम्मू एवं कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी को हल चिन्ह के आवंटन को अधिसूचित करने का आदेश दिया था।
लद्दाख प्रशासन ने 9 अगस्त के जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय की एकल पीठ के आदेश के खिलाफ खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया था, जिसने नेकां को पहले से आवंटित आरक्षित प्रतीक हल को अधिसूचित करने के लिए लद्दाख प्रशासन के चुनाव विभाग के कार्यालय से संपर्क करने का निर्देश दिया था।
10 सितंबर को होना था मतदान
चुनाव विभाग द्वारा 5 अगस्त को जारी एक अधिसूचना के अनुसार 30 सदस्यीय एलएएचडीसी कारगिल की 26 सीटों के लिए मतदान 10 सितंबर को और वोटों की गिनती चार दिन बाद होनी थी।
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) को चुनाव चिह्न 'हल' आवंटित कर दिया है। नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने शीर्ष अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'हमें वह फैसला मिला है, जिसके हम हकदार थे।' आगे उन्होंने लद्दाख यूटी प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा, 'भारतीय जनता पार्टी ने पक्षपाती लद्दाख प्रशासन की सहायता से हमें हमारे अधिकारों से वंचित करने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हुए। अदालत ने लद्दाख प्रशासन को एक लाख रुपये के जुर्माने से भी किया है।'