नेवा के नौगाम इलाके में फ्रूट प्लांट नर्सरी में 100 कनाल जमीन पर शुरू किया गया प्रोजेक्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। कश्मीर के सदियों पुराने बादाम उद्योग को फिर से जीवित करने की एक अहम पहल के तहत बागवानी विभाग ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में ज्यादा घनत्व वाली (हाई-डेंसिटी) बादाम की खेती का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, नेवा के नौगाम इलाके में फ्रूट प्लांट नर्सरी में 100 कनाल जमीन पर फैला यह प्रोजेक्ट, बादाम का उत्पादन बढ़ाने और फसल को फिर से आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाने में आधुनिक खेती के तरीकों की क्षमता को दिखाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट घाटी में बादाम की खेती में लगातार आ रही गिरावट को रोकने के लिए विभाग की कोशिशों का हिस्सा है। ज्यादा घनत्व वाले बागवानी तरीकों को अपनाकर, विभाग उत्पादकता बढ़ाने, बागों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने, किसानों की कमाई बढ़ाने और उत्पादकों को बादाम की खेती की ओर लौटने के लिए प्रोत्साहित करने की उम्मीद कर रहा है।
कश्मीर में पारंपरिक बादाम उद्योग में पिछले कुछ सालों में मौसम के बदलते मिज़ाज, कम पैदावार और घटते मुनाफे के कारण भारी गिरावट देखी गई है। अनिश्चित मुनाफे के कारण बड़ी संख्या में किसान बादाम की खेती छोड़कर ज्यादा घनत्व वाले सेब के बागों की ओर बढ़ गए हैं, जो कम जमीन पर भी काफी अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक रिटर्न देते हैं। पुलवामा जो कभी अपने बड़े-बड़े बादाम के बागों के लिए जाना जाता था, हाल के वर्षों में काफी बदल गया है।
जिले भर में हजारों कनाल पारंपरिक बादाम के बागों को ज्यादा घनत्व वाले सेब के बागों में बदल दिया गया है, जिससे कश्मीर की सबसे पुरानी बागवानी फसलों में से एक के धीरे-धीरे खत्म होने की चिंता बढ़ गई है। पुलवामा के मुख्य बागवानी अधिकारी रियाज अहमद शाह ने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट बादाम उत्पादकों का भरोसा फिर से जीतने की दिशा में एक अहम कदम है। इस प्रोजेक्ट का मकसद स्थानीय परिस्थितियों में ज्यादा घनत्व वाले बादाम के बागों के प्रदर्शन का आकलन करना है। अगर नतीजे अच्छे रहें तो इस मॉडल को पूरे जिले के किसानों तक पहुंचाया जाएगा ताकि वे खेती के आधुनिक तरीके अपना सकें, उत्पादन बढ़ा सकें और अपनी आय में सुधार कर सकें।
बाग का वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी
जानकारों का मानना है कि बेहतर किस्मों को लाने, वैज्ञानिक बाग प्रबंधन और ज्यादा घनत्व वाली बागवानी तकनीकों को अपनाने से कश्मीर में बादाम की खेती को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाने में अहम भूमिका निभाई जा सकती है। उनका कहना है कि पुलवामा पायलट प्रोजेक्ट की सफलता घाटी के दूसरे बादाम उत्पादक इलाकों में भी ऐसी ही पहल का रास्ता साफ कर सकती है। खेती के रकबे में कमी के बावजूद दक्षिण कश्मीर खासकर पुलवामा में हजारों परिवारों की आजीविका का जरिया बादाम की खेती बनी हुई है। उत्पादकों और बागवानी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अगर नया मॉडल सफल रहता है तो इससे किसानों को अपने बागों में विविधता लाने और क्षेत्र के बादाम उद्योग को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, यह उस फसल को फिर से स्थापित करने में भी सहायक होगा, जो लंबे समय से कश्मीर की बागवानी पहचान का अहम हिस्सा रही है।