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ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति: नवंबर में पूरा होगा श्रीनगर सेमी रिंग रोड का पहला चरण

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श्रीनगर। श्रीनगर सेमी रिंग रोड प्रोजेक्ट का पहला चरण नवंबर महीने तक पूरा होने की पूरी उम्मीद है। हालांकि जमीन अधिग्रहण, मुआवजे के दावों और बिजली-पानी की लाइनों को शिफ्ट करने में आ रही प्रशासनिक अड़चनों के कारण परियोजना के बाकी हिस्सों में काम की रफ्तार थोड़ी प्रभावित जरूर हुई है।
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) श्रीनगर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आकाश दीप सिंह ने बताया कि पुलवामा जिले के गालंदर से बांदीपोरा के सराय डांगरपोरा तक फैले 42.10 किलोमीटर लंबे पहले चरण का काम अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर बांदीपोरा में एक बिजली ट्रांसमिशन टावर के लिए बची हुई जमीन जिला प्रशासन द्वारा जल्द सौंप दी जाती है तो नवंबर की समय-सीमा के भीतर पहला फेज पूरी तरह तैयार हो जाएगा। लगभग 2,920 करोड़ रुपये की लागत वाला यह पहला चरण इस पूरे रिंग रोड की रीढ़ है, जिसे पहले नारबल तक ही बनाया जाना था लेकिन बाद में इसका विस्तार बांदीपोरा तक कर दिया गया। पिछले कुछ महीनों में रिफाइनरियों से बिटुमैन की आपूर्ति में आई रुकावटों के कारण सिविल कार्यों की गति थोड़ी धीमी हुई थी, जिसे अब दुरुस्त कर लिया गया है।
परियोजना के दूसरे चरण का काम भी समानांतर रूप से आगे बढ़ रहा है, जो सराय डांगरपोरा से गांदरबल जिले के वायुल तक 24.70 किलोमीटर लंबा है। इस हिस्से का लगभग 50 प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन जमीन का कब्जा पूरी तरह न मिलने के कारण यह अपनी तय समय-सीमा से थोड़ा पिछड़ सकता है। एनएचएआई ने गांदरबल और बांदीपोरा के उपायुक्तों से जमीन और मुआवजे के इन विवादों को जल्द से जल्द सुलझाने की अपील की है। इसके अलावा, पांदछ से वायुल के बीच फेज-2ए में भी भूमि विवाद आड़े आ रहा है, जिसमें गांदरबल शहर से गुजरने वाला 2.55 किलोमीटर लंबा एक एलीवेटेड कॉरिडोर भी शामिल है। दूसरी तरफ, लसजन से हजरतबल होते हुए पांदछ को जोड़ने वाले 24.60 किलोमीटर लंबे तीसरे चरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अभी उच्च स्तर पर मंजूरी के इंतजार में है, जिसमें एक विशेष एयरपोर्ट कनेक्टिविटी कॉरिडोर भी प्रस्तावित है।
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प्रधानमंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के तहत तैयार हो रहा यह श्रीनगर सेमी रिंग रोड आने वाले समय में 85 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा जो पुलवामा, बडगाम, श्रीनगर, बारामुला, बांदीपोरा और गांदरबल सहित छह महत्वपूर्ण जिलों को आपस में जोड़ेगा। शुरुआत में फोर-लेन हाईवे के रूप में बनाए जा रहे इस कॉरिडोर में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सिक्स-लेन विस्तार की गुंजाइश भी रखी गई है। इसके पूरी तरह चालू होने से न केवल श्रीनगर शहर को मालवाहक वाहनों और भारी ट्रैफिक के रोजाना लगने वाले जाम से स्थायी मुक्ति मिलेगी, बल्कि पूरी कश्मीर घाटी में औद्योगिक विकास, पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों को भी एक नई उड़ान मिलेगी।
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