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Srinagar News: तंगधार के अंडरग्राउंड ऑपरेशन थियेटर में 220 लोगों की लौटी आंखों की रोशनी

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श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटा तंगधार सेक्टर, जो कभी सीमा पार से होने वाली पाकिस्तानी गोलाबारी और दहशत के लिए जाना जाता था, आज अमन और मानवीय सेवा के नए दौर का गवाह बन रहा है। सरहद पर सेना न केवल देश की हिफाजत और आतंकवाद के खात्मे के लिए डटी है, बल्कि ''''ऑपरेशन सद्भावना'''' के तहत सीमांत इलाकों के नागरिकों की सेवा कर उनके दिलों को भी जीत रही है। इसी कड़ी में गोलाबारी के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित बनाए गए एक भूमिगत (अंडरग्राउंड) ऑपरेशन थियेटर में सेना के डॉक्टरों ने ''''ऑपरेशन दृष्टि'''' के तहत 220 स्थानीय लोगों की आंखों का सफल ऑपरेशन कर उनकी दुनिया में रोशनी लौटा दी है।
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सेना के दिल्ली कैंट स्थित रिसर्च एंड रेफरल (आर एंड आर) अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस ''''मेगा सर्जिकल आउटरीच कैंप'''' में उन्नत चिकित्सा तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ब्रिगेडियर मिश्रा ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र होने और गोलाबारी के जोखिम के मद्देनजर यह अंडरग्राउंड ऑपरेशन थियेटर सुरक्षा का एक मजबूत कवच प्रदान करता है। यह पहला मौका है जब इस भूमिगत सुविधा का उपयोग इतने बड़े पैमाने पर सर्जिकल कैंप के लिए किया गया है। श्रीनगर से लगभग छह से आठ घंटे की बेहद दुर्गम और जोखिम भरी सड़क यात्रा के बावजूद सेना ने अत्याधुनिक संवेदनशील मेडिकल उपकरण यहां तक सुरक्षित पहुंचाए, ताकि दूरदराज के ग्रामीणों को उनके घर के पास ही विशेषज्ञ इलाज मिल सके।
इस ऐतिहासिक मानवीय मिशन की सराहना करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (एएफएमएस) की टीम और सर्जनों को बधाई दी। उपराज्यपाल ने कहा कि सरहद के चुनौतीपूर्ण माहौल में भूमिगत ऑपरेशन थियेटर के भीतर फेकोइमल्सीफिकेशन, रेटिना और ग्लूकोमा जैसी जटिल सर्जरी कर 220 नागरिकों की आंखों की रोशनी लौटाना एक असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा और उनकी टीम का यह समर्पण ''''ऑपरेशन सद्भावना'''' की सच्ची भावना को दर्शाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि देश का कोई भी नागरिक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। वहीं, सेना के अधिकारियों ने दोहराया कि वे हमेशा स्थानीय आबादी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और भविष्य में भी सीमांत गांवों में ऐसे स्वास्थ्य शिविर जारी रहेंगे।
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