श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उनके शानदार प्रदर्शन को याद करते हुए उपराज्यपाल ने मेजर ध्यानचंद को भारत के सबसे गहरे और स्थायी प्रतीकों में से एक बताया, जिनकी प्रतिभा ने दुनिया को रुकने और भारत की अपार खेल प्रतिभा को स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।
स्कॉस्ट कश्मीर के शालीमार कैंपस में हुए इस कार्यक्रम में अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने कहा कि मेजर ध्यानचंद की हॉकी स्टिक का हर प्रहार अनुशासन, समर्पण और इच्छाशक्ति का प्रतीक था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेल केवल पदक जीतने के बारे में नहीं हैं, बल्कि लचीलापन, एकता और राष्ट्र-निर्माण की भावना विकसित करने के बारे में हैं।
खेल जीवन के सबसे ईमानदार शिक्षक हैं। खेल का मैदान कभी झूठ नहीं बोलता, बल्कि यह आपको ठीक-ठीक बताता है कि आज आप कहां खड़े हैं और कल बेहतर बनने के लिए आपको क्या करना होगा। खेलों में कोई शॉर्टकट नहीं होता। यहां तक कि हॉकी के मैदान पर भी बहाने की कोई जगह नहीं है। वहां केवल कड़ी मेहनत, अवसर और आपके चरित्र की परीक्षा होती है।
खेल राष्ट्र-निर्माण की उस बुनियादी ताकत को विकसित करते हैं जिसकी समाज को जरूरत है। खेल ऐसे युवाओं को तैयार करते हैं जो जानते हैं कि कैसे गिरना है और फिर जीत का झंडा फहराने के लिए कैसे उठना है। खेल उस भावना और सोच को पोषित करते हैं जो हमें सामूहिक जीत में विश्वास करना सिखाती है।
खेल सपनों को पंख देते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की जहां हर ग्राम पंचायत खेलों की ताकत का इस्तेमाल करे, जहां छोटे शहरों में अकादमियां प्रतिभाओं को निखारें और जहां किसानों की बेटियों को भी बड़े शहरों के ''''सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'''' में खिलाड़ियों की तरह ही वैज्ञानिक प्रशिक्षण मिले।
उपराज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और संस्थानों में स्पोर्ट्स साइंस, मैनेजमेंट और तकनीकी विशेषज्ञता के महत्व पर भी जोर दिया। इससे भविष्य के लिए ट्रेनर, फिजियोथेरेपिस्ट और मैनेजर तैयार हो सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर न केवल अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में हिस्सा लेगा, बल्कि उनकी मेजबानी भी करेगा और दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेगा। यह असीम संभावनाओं वाला संकल्प है। पिछले छह वर्षों में खेलों में हमारी उपलब्धियां साबित करती हैं कि अगर युवाओं को लगन के साथ खेलों के लिए तैयार किया जाए तो यह क्षेत्र चैंपियंस का एक पूरा दौर तैयार करेगा। 2047 के ''''विकसित भारत'''' के निर्माण में योगदान देने के लिए युवाओं का आह्वान करते हुए उपराज्यपाल ने जोर दिया कि चैंपियंस अनुशासन और मेहनत से बनते हैं, शॉर्टकट से नहीं। उन्होंने कॉर्पोरेट घरानों से अपील की कि वे एथलीटों का समर्थन केवल पदक जीतने के बाद ही नहीं बल्कि उनकी प्रतिभा की पहचान के चरण में ही करें। उन्होंने चैंपियंस को तैयार करने में समाज, कोच, सपोर्ट स्टाफ़ और माता-पिता की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।
युवाओं के लिए तीन कर्त्तव्यों की रूपरेखा बताई
उपराज्यपाल ने युवाओं के लिए तीन कर्त्तव्यों की रूपरेखा बताई: उदाहरण पेश करके नेतृत्व करना, सम्मान के साथ प्रतिस्पर्धा करना, हार को शालीनता से स्वीकार करना और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करना। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे खेलों की एकता का उपयोग भाषा और धर्म के मतभेदों से ऊपर उठने के लिए करें। उपराज्यपाल ने युवाओं से समाज को वापस कुछ देने का आह्वान किया - अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन और मेंटरशिप करके और उस समुदाय का ऋण चुकाकर जो हर एथलीट का समर्थन करता है। उन्होंने ''''नशा-मुक्त अभियान'''' में युवाओं की भागीदारी की सराहना की। इससे देश के लिए एक मिसाल कायम हुई। उन्होंने दोहराया कि विकास को केवल जीडीपी से नहीं बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास से मापा जाता है।
हमें अपना लक्ष्य पहचानना होगा
उपराज्यपाल ने कहा, एक स्वस्थ भारत एक निडर भारत है। खेलों में आगे रहने वाला भारत एक आत्मविश्वासी भारत है और एक आत्मविश्वासी भारत एक अजेय भारत है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने पूरी दुनिया को एक संदेश दिया था - अपना लक्ष्य खोजो। आज भी हमारा यही संदेश होना चाहिए। हम चाहे किसी भी क्षेत्र में हों - खेल, विज्ञान या जनसेवा - हमें अपना लक्ष्य पहचानना होगा, उसकी ओर बढ़ना होगा और मिलकर उसे हासिल करना होगा। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय खेल दिवस की शपथ दिलाई और 69वें राष्ट्रीय स्कूल खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया। जम्मू-कश्मीर में खेलों को बढ़ावा देने के लिए युवा सेवा एवं खेल निदेशालय और अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन, दानी स्पोर्ट्स फाउंडेशन और कॉमन सर्विसेज सेंटर्स के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।