श्रीनगर। कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों को राज्य के दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए एकजुट होकर प्रयास करने चाहिएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यधारा के राजनीतिक दलों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे जनता के अधिकारों के लिए खुलकर खड़े हों और एक संगठित आवाज उठाएं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी के इस्तीफे से जुड़े सवाल पर पत्रकारों से बात करते हुए मीरवाइज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता के अधिकार जबरन छीने गए, राज्य का दर्जा समाप्त कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। उन्होंने कहा कि जिस वादे के आधार पर मौजूदा नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार बनी थी, उसे उन वादों पर पूरी तरह खरा उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली और सड़क जैसे रोजमर्रा के मुद्दे अपनी जगह हैं, लेकिन असल चिंता यह है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के मूल अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है। अनुच्छेद 370 उसी बुनियाद का हिस्सा था जिस पर विलय हुआ था, इसलिए राजनीतिक दलों को इसकी बहाली के लिए भी अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।
मीरवाइज ने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अपनी मूल प्राथमिकताओं से भटकती दिख रही है। जिस उम्मीद और जनादेश के साथ जनता ने इस पार्टी को चुना था, उस पर वह खरी नहीं उतर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के छीने गए अधिकारों, राज्य के विभाजन और सांविधानिक गारंटियों के उल्लंघन के खिलाफ मजबूती से खड़ी नहीं हो पा रही है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
कश्मीरी पंडित समाज का अभिन्न अंग: मीरवाइज
श्रीनगर। कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मीरवाइज ने कहा कि कश्मीरी पंडित हमारे समाज, संस्कृति, इतिहास और भविष्य का अभिन्न हिस्सा हैं। वे कोई बाहरी नहीं हैं, बल्कि यहीं के हैं। उनकी सुरक्षित व सम्मानजनक वापसी के लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर लगातार प्रयास करने चाहिएं।