श्रीनगर/गांदरबल। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के वांगथ इलाके में स्थित नारानाग प्राचीन हिन्दू तीर्थस्थल को तीर्थ पर्यटन के मानचित्र पर लाने के लिए नया रूप देने की आवश्यकता है।
मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में बुटेश्वर और ज्येष्ठेश्वर के प्राचीन नाम के साथ नारानाग मंदिर ज्येष्ठ या भगवान शिव को समर्पित है। इसके आसपास सहायक मंदिर हैं। इतिहासकार अनिल रैना के अनुसार, हालांकि मंदिर सातवीं शताब्दी से पहले अस्तित्व में था। कर्कोटा वंश के राजा ललितादित्य मुक्तापिदा (724 सीई-760 सीई) जो कश्मीर के सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली शासकों में से एक थे ने इन परिसरों को विकसित करने के लिए बड़ी मात्रा में धन दान किया और शिव ज्येष्ठेश को समर्पित एक मंदिर का निर्माण किया।
बाद में, आठवीं शताब्दी में राजा अवन्तिवर्मन ने भगवान भूतेश्वर की मूर्ति के स्नान के लिए स्थल पर एक चांदी की नाली के साथ एक पत्थर की चौकी का निर्माण किया। परिसर में प्रवेश करते समय, पश्चिमी भाग के छह मंदिरों का एक समूह है जिसे शिव-ज्येष्ठ के रूप में जाना जाता है और एक बाड़े के अंदर स्थित है, जबकि मुख्य मंदिर अभी भी खड़ा है। पूर्वी परिसर मंदिरों का दूसरा समूह है, जो एक विशाल पत्थर की दीवार से घिरा हुआ है। इस परिसर में मौजूद ये छह मंदिर पूरी तरह से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। यद्यपि मंदिर परिसर अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन है। इसे तीर्थ पर्यटन के मानचित्र पर लाने के लिए एक नया रूप और उचित सुरक्षा की आवश्यकता है जो न केवल कश्मीर के प्राचीन इतिहास को बढ़ावा देगा बल्कि यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।
वहीं स्थानीय युवाओं के एक समूह ने कहा कि नारानाग घाटी की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। उन्होंने कहा, इस जगह पर दुनिया भर से पर्यटक आते हैं लेकिन उन्हें यहां नेटवर्क और बुनियादी सुविधाओं जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस बीच मंदिर के खंडहर में मौजूद एक पर्यटक आकाश भट्ट ने कहा, मैं सुन रहा था कि कश्मीर धरती पर स्वर्ग है। अब यहां आने के बाद मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है। कश्मीरी लोग आतिथ्य सत्कार में सबसे अच्छे होते हैं, दयालु स्वभाव के होते हैं और बहुत मददगार होते हैं। गुजरात के एक अन्य पर्यटक ने कहा कि वह घाटी को एक्सप्लोर करना चाहता है। उन्होंने कहा, हम कश्मीर में और जगहों को देखने के लिए उत्साहित हैं। कहा कि ऐसी जगहों को तीर्थ पर्यटन के मैप पर लाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिएं।
इस बीच स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ऐतिहासिक स्मारक को संरक्षित करने और यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे बल्कि अपने इस ऐतिहासिक धरोहर को भी संरक्षित किया जा सकता है।