पूर्व सदर-ए-रियायत डॉ. कर्ण सिंह।
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पूर्व सांसद और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सदर-ए-रियायत डॉ. कर्ण सिंह ने कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील में टापू पर बनी लेक पवेलियन संपत्ति को सीआरपीएफ से खाली करवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। लेक पवेलियन कबूतरखाना नाम से भी मशहूर है। डॉ. करण सिंह जम्मू-कश्मीर के अंतिम महाराजा हरि सिंह के पुत्र हैं, जो 18 वर्ष की आयु में प्रदेश के शासक बने थे।
डॉ. सिंह ने याचिका में कहा है कि वे डल झील के बीच 21 कनाल 19 मरला भूमि और उस पर बनी संपत्ति के मालिक हैं। वर्ष 1990 में बीएसएफ ने इस संपत्ति पर अपना कब्जा ले लिया था। बाद में इसका किराया तय हुआ, जो बेहद कम है। याचिका में कहा गया है कि 1990 से 1993 तक यह संपत्ति बिना किराया तय किए बीएसएफ के पास रही।
बीएसएफ के कब्जे के दौरान पूरी संपत्ति का मासिक किराया 1464 रुपये प्रतिमाह तय किया गया। बीएसएफ ने 2003 तक इसे अपने कब्जे में रखा, जिसे बिना उनकी अनुमति के सीआरपीएफ के हवाले कर दिया गया। सिंह ने कहा है कि उनकी संपत्ति की हालत जर्जर हो चुकी है, जिसे तत्काल खाली करवाया जाए। कोर्ट से मांगा करते हुए उन्होंने कहा है कि किराये का सही निर्धारण कर उन्हें 18 फीसदी ब्याज के साथ बकाया राशि का भुगतान किया जाना चाहिए। वे अब इस संपत्ति की मरम्मत कर इसे निजी इस्तेमाल में लाना चाहते हैं।