श्रीनगर। दुष्कर्म को जघन्य अपराध करार देते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी। न्यायाधीश मोहम्मद अकरम चौधरी ने कहा कि ऐसे संगीन अपराध के मामले में अदालत को बेहद संवेदनशीलता दिखानी होगी। याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप साबित हुआ है, लिहाजा उसके साथ कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। उसे अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।
श्रीनगर के रामबाग पुलिस थाने में दर्ज मामले से जुड़ी याचिका में कहा गया कि दुष्कर्म का मामला फर्जी है, जिसे प्रताड़ित करने की मंशा से दर्ज कराया गया है। ऐसे में याची ने एफआईआर खारिज करने की अपील की अर्जी भी दी है। वहीं, कोर्ट ने पाया कि आईपीसी की धारा 376 के तहत दर्ज मामले में पीड़िता के बयान दर्ज करवाने के अलावा चिकित्सा जांच भी करवाई गई है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग रहा है। मामले की जांच अभी चल रही है। न्यायाधीश ने कहा कि दुष्कर्म न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी महिला को नुकसान पहुंचाता है। इन तमाम पहलुओं को देखते हुए याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।