इस बार अब हम 4 अगस्त को यहां से प्रस्थान करेंगे। 4 और 5 अगस्त को पहलगाम में रुकेंगे। द्वादशी की रात्रि चंदनवाड़ी, त्रयोदशी की रात्रि शेषनाग, चतुर्दशी की रात्रि पंचतनी और अंतत: श्रावण पूर्णिमा की रात जो इस वर्ष 9 अगस्त को है, हम पवित्र छड़ियों को उस पवित्र गुफा में लेकर जाएंगे, जहां पर माता पार्वती के आग्रह करने पर महा शिव ने वह कथा कही जिससे जीवन और मृत्यु का जो चक्र है, उससे मुक्ति मिल जाती है।
हम 9 अगस्त की रात्रि पंचतनी में आकर रुकेंगे। 10 को पैदल चलेंगे, चंदनबाड़ी होकर रात्रि पड़ाव पहलगाम में करेंगे। द्वितीया के दिन लिद्दर नदी के किनारे पूजन और विसर्जन होगा। भोज के बाद इस साल की छड़ी मुबारक की यात्रा संपन्न हो जाएगी।
आतंकवाद के प्रति जागरूक हों लोग
महंत दीपेंद्र गिरी ने बताया कि एक समय ऐसा था जब आतंकवाद चरम पर था। पुलिस और सेना तो सुरक्षा करती ही है, शिवजी के जो भक्त हैं वह अपनी अटूट आस्था के कारण भोले के भरोसे यहां आते हैं। आज के हालात में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आये, उन्होंने अपने भगवान में आस्था जताई और यहां के पर्यटन को भी फिर से जिंदा किया।
अब माहौल बहुत अच्छा है, वह दुखद घटना थी जिसे नहीं होना चाहिए था। मैं यहां के लोगों से भी कहना चाहता हूं कि वह भी जागरूक रहें। अगर कोई असमान्य घटना दिखे तो प्रशासन या सुरक्षा एजेंसियों को बताएं।
यात्रा स्थगित, चल रहा मरम्मत का कामअमरनाथ यात्रा को रविवार से स्थगित कर दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण बालटाल और नुनवान दोनों मार्गों पर ट्रैक खराब हैं। इन्हें मरम्मत और रखरखाव के कारण बंद किया गया है। रविवार से ट्रैक पर कर्मियों और मशीनों की निरंतर तैनाती के कारण, यात्रा फिर से शुरू नहीं कर पाएंगे। इसलिए दोनों मार्गों से यात्रा अब स्थगित रहेगी। यात्रा 9 अगस्त को समाप्त होनी थी।
भक्तों की आस्था
मैं लगातार 27 साल से बाबा के दर्शन के लिए आ रहा हूं। इस बार काफी सुरक्षा है। प्रशासन की व्यवस्थाएं भी शानदार हैं। बाबा बर्फानी के दर्शन से पहले छड़ी के दर्शन के लिए उपस्थित हूं। मेरा तो जीवन ही धन्य हो गया।
प्रदीप माधोराव शिवसागर, पुणे
छड़ी मुबारक के दर्शन के लिए आया था। बाबा बर्फानी में आस्था है, घर में भी एक मंदिर बना रखा है, जहां आसपास के लोग भी पूजा करने आते हैं। बारिश की वजह से यात्रा में बाधा आई है, बाबा जल्द इस संकट को भी हरेंगे।
रोनित अरोड़ा, श्रीनगर