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Srinagar News: बढ़ती बीमारियों को लेकर जीएमसी ने जारी की एडवाइजरी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कठुआ। मानसून के दौरान बढ़ती उमस, जलभराव और दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों को देखते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) ने आम लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में बताया गया है कि मानसून के मौसम में वातावरण में बढ़ी नमी और तापमान बैक्टीरिया, वायरस, फंगस तथा मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करते हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

मानसून में दूषित पानी, खराब स्वच्छता और जलभराव के कारण टाइफाइड, हैजा, गैस्ट्रोएन्टेराइटिस, हेपेटाइटिस-ए, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल फीवर और फंगल संक्रमण जैसी बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से साफ-सफाई बनाए रखने, सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है। डॉक्टरों के अनुसार, उमस भरे मौसम का सबसे अधिक असर फेफड़ों और त्वचा पर पड़ता है। अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने, घरों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर इनहेलर जैसी आवश्यक दवाएं अपने पास रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा त्वचा संबंधी समस्याओं से बचने के लिए विशेषज्ञों ने पसीना आने के बाद स्नान करने, सूती और ढीले कपड़े पहनने, शरीर को सूखा रखने तथा त्वचा की सिलवटों में नमी जमा न होने देने की सलाह दी है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान उबला या शुद्ध किया हुआ पानी पीने, बाहर का कटा हुआ या खुला भोजन न खाने, हाथों की नियमित सफाई करने, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक जाने से बचने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही घरों में पानी जमा न होने देने और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की भी अपील की गई है। अगर किसी भी व्यक्ति में तेज बुखार, लगातार दस्त, उल्टी, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें और बिना देरी चिकित्सक से संपर्क करें। हल्के लक्षणों में एक दिन तक घरेलू देखभाल की जा सकती है, लेकिन गंभीर स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
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