अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने एडवाइजरी जारी की है। संस्थान ने लोगों को ठंड के दौरान बढ़ने वाली श्वसन (सांस), हृदय (दिल) और न्यूरोलॉजिकल (दिमाग व तंत्रिका) संबंधी जटिलताओं से सतर्क रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी है। स्किम्स के इंटरनल एंड पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि शरद और सर्दियों के महीनों में वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है, जबकि शून्य से नीचे गिरता तापमान पुरानी बीमारियों जैसे अस्थमा, सीओपीडी, दिल की बीमारियों और कुछ न्यूरोलॉजिकल विकारों को और गंभीर बना सकता है। इसलिए अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए लोगों को परतों वाले कपड़े पहनने चाहिए ताकि शरीर का तापमान बना रहे। बाहर निकलते समय नाक और मुंह को अच्छे से ढककर रखने, बार-बार हाथ धोने, चेहरे को न छूने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर हाइड्रेटेड रहने तथा घर के भीतर ही शारीरिक गतिविधियां जारी रखने की सलाह दी है। इसके अलावा, बर्फबारी या फिसलन वाली सतहों पर ग्रिप वाले जूतों का उपयोग करने को कहा गया है।
रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद लेने और मानसिक तनाव से बचने की अपील की गई है। श्वसन संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए इन्फ्लूएंजा (फ्लू) और निमोनिया का समय पर टीकाकरण कराने को कहा गया। हाई ब्लड प्रेशर और पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अपनी दवाएं बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से लेने तथा ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहने की सलाह दी गई है।
एडवाइजरी में डॉक्टरों के सलाह के बिना दवाएं नहीं लेने की अपील की गई है। साथ ही खांसी या सांस फूलने की समस्या , ऑक्सीजन सेचुरेशन में गिरावट के साथ नया बुखार आना, छाती के बाएं हिस्से में दर्द के साथ सांस लेने में तकलीफ (हार्ट अटैक का लक्षण) तथा हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, बोलने में कठिनाई, मुंह का तिरछा होना या चलने में संतुलन बिगड़ना (ब्रेन स्ट्रोक का लक्षण) को नजरअंदाज नहीं करने को कहा गया है।