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1993 की मुलाकात, 1994 की शादी और अब अलगाव: CM उमर और पायल की 32 साल पुरानी कहानी का अंत, दोनों की मंजिलें अलग

Fri, 31 Jul 2026 08:36 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर

सार

करीब 32 साल के रिश्ते के बाद सीएम उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला कानूनी तौर पर अलग हो गए हैं। 1993 में शुरू हुई उनकी प्रेम कहानी, 1994 की शादी और लंबे गुजारा भत्ता विवाद के बाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
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पायल अब्दुल्ला और सीएम उमर अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पूर्व पत्नी पायल अब कानूनी तौर पर अलग हो गए हैं। करीब 32 साल बाद इस अलगाव में दोनों के बीच शादी का रिश्ता 17 साल रहा और विवाद डेढ़ दशक तक चला। वर्ष 2011 में दोनों के बीच तलाक तय हुआ था। हालांकि बाद में गुजारा भत्ते से जुड़ा मामला दोबारा कोर्ट की दहलीज में पहुंच गया।
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1993 में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पायल की मुलाकात दिल्ली के ऑबराय होटल में हुई थी। उमर यहां मार्केटिंग एग्जेक्युटिव थे और पायल नाथ भी उस समय वहीं काम करती थीं। इसके एक साल बाद दोनों ने शादी का फैसला किया। 1994 में यह उस जमाने की सबसे चर्चित शादियों में से एक थी।जम्मू-कश्मीर में इस शादी को लेकर कोई विरोध नहीं हुआ। दरसअल, उमर अब्दुल्ला से पहले उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी मौली से 1967 में लव मैरिज की थी। पायल अब्दुल्ला शादी से पहले नाथ सरनेम लिखती थीं। उनके पिता रामनाथ भारतीय सेना में मेजर जनरल भी रह चुके हैं। मेजर जनरल रामनाथ मूल रूप से लाहौर के रहने वाले थे। बंटवारे के बाद उनकी फैमिली भारत आई थी।

शादी से मिली लोकप्रियता, सियासत से रखा किनाराशादी के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सियासत में सक्रिय हो गए। उन्होंने पहले वर्ष 1996 के विधानसभा और इसके बाद 1998 के लोकसभा चुनाव लड़ा। 1998 के चुनाव में उमर के साथ कई मौकों पर पायल भी नजर आईं। बताया जाता है कि उस समय पर्दे के पीछे पायल ने चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी। उमर अब्दुल्ला के साथ मौजूदगी की वजह से उन्हें समूचे प्रदेश में ख्याति मिल रही थी। हालांकि उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस में कोई भी पद नहीं लिया और उमर के सांसद बनने के बाद वह दिल्ली चली गईं। इसके बाद उनका ज्यादातर समय दिल्ली में ही गुजरा।

गुजारे भत्ते की वजह सेसुर्खियों में आया मामला
वर्ष 2011 में उमर अब्दुल्ला और पायल का तलाक हो गया था। मुख्यमंत्री ने उस समय खुद इसकी जानकारी सार्वजनिक की थी लेकिन इसके बाद गुजारा भत्ते का विवाद सुर्खियों में आ गया। निचली अदालत ने गुजारा भत्ते के लिए रकम तय की। इसके बाद हाईकोर्ट में मामला पहुंचा। हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ते की रकम को 1.50 लाख रुपये करने का फैसला दिया। वर्ष 2016 के बाद से बच्चे भी पायल के साथ दिल्ली में रहने लगे। जमीर और जहीर की पढ़ाई के लिए भी 60-60 हजार रुपये गुजारा भत्ता तय किया गया था। 
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पायल का कुल्लू में है मिनरल वाटर प्लांट
पायल खुद भी पेशे से कारोबारी हैं। वह दिल्ली में ट्रैवल बिजनेस चलाती हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में उनका मिनरल वाटर पैकेजिंग प्लांट भी है। पायल जम्मू-कश्मीर से लौटने के बाद दिल्ली में ही रह रहीं हैं।
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