पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को खुद को "दिमागी नक्सल" बताया। उन्होंने यह टिप्पणी संविधान के आर्टिकल 370 का समर्थन करने के कारण की। आर्टिकल 370 ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को खुद को "दिमागी नक्सल" बताया। उन्होंने यह टिप्पणी संविधान के आर्टिकल 370 का समर्थन करने के कारण की। आर्टिकल 370 ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था। मुफ्ती ने यह बात अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके कही।
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पीडीपी अध्यक्ष मुफ्ती ने संसदीय मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। रिजिजू ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी नेताओं को "दिमागी नक्सल" नहीं कहा। उन्होंने उन लोगों की श्रेणियां बताईं जिन्हें दिमागी नक्सल कहा जा सकता है। रिजिजू के अनुसार, जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते, वे दिमागी नक्सल हैं। जो अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और आर्टिकल 370 का समर्थन करते हैं, वे भी इस श्रेणी में आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो उत्तर-पूर्व को भारत से अलग करने के लिए 'चिकन नेक' (संकरे गलियारे) को काटना चाहते हैं, वे भी दिमागी नक्सल हैं। मुफ्ती की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के भाषण के एक दिन बाद आई है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में "दिमागी नक्सल" का जिक्र किया था।
प्रधानमंत्री की चेतावनी
प्रधानमंत्री मोदी ने देश को उन "दिमागी नक्सलियों" के बारे में आगाह किया था। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने कथित तौर पर सिस्टम में अपनी पैठ बना ली है। ये नीतियों में हेरफेर करके समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से ऐसे लोगों को पहचानने और अलग-थलग करने का आग्रह किया।
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वैचारिक समर्थकों पर चिंता
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश जंगलों से सशस्त्र नक्सलवाद को खत्म करने में सफल रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इसके वैचारिक समर्थक अभी भी सक्रिय हैं। ये हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के मौके तलाश रहे हैं। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी ने विपक्ष और भाजपा के बीच जुबानी जंग छेड़ दी है।