वेतन बिल को लेकर नेकां और भाजपा आमने-सामने
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पहलगाम से नेकां विधायक अल्ताफ कल्लू ने विधायकों और मंत्रियों के वेतन में बढ़ोतरी से जुड़े बिल को वापस लिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि तीन लाख रुपये वेतन की मांग पूरी नहीं होने के कारण उसने बिल का विरोध किया। कल्लू ने कहा कि भाजपा के विधायकों ने पहले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन सदन में इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया गया।
शाम लाल शर्मा ने किया पलटवार
भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा ने कल्लू के आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि भाजपा ने बिल को खारिज नहीं किया था, बल्कि सरकार ने इसे वापस लिया था। शर्मा ने कहा कि भाजपा का सुझाव था कि विधायकों का वेतन बढ़ाने के बजाय इन पैसों का इस्तेमाल दिहाड़ी मजदूरों, जरूरत के आधार पर काम कर रहे कैजुअल कर्मचारियों और विभिन्न समेकित योजनाओं के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के लिए किया जाए। बहस बढ़ने पर शर्मा ने कल्लू से कहा कि सदन में इस मुद्दे पर राजनीति न की जाए।
स्पीकर ने मामला आगे बढ़ाने से रोका
विवाद बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि यह मामला मंगलवार को ही समाप्त हो चुका है और अब इसे दोबारा सदन में उठाने का कोई मतलब नहीं है। इसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी और प्रश्नकाल शुरू हुआ।
अनियंत्रित सोशल मीडिया पर मीडिया नीति बनाने की तैयारी
सदन में अनियंत्रित सोशल मीडिया के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठा। कई विधायकों ने ऐसे सोशल मीडिया यूजर्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
मंत्री सकीना इटू ने बताया कि इस मुद्दे की जांच के लिए विधायक अली मोहम्मद सागर की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। उन्होंने कहा कि समिति ने सूचना विभाग को व्यापक मीडिया नीति तैयार करने का जिम्मा दिया है, जिसे चार महीने के भीतर तैयार किया जाना है।
बोलने का मौका नहीं मिलने पर वेल में पहुंचे मेहराज मलिक
प्रश्नकाल के दौरान डोडा से आप विधायक मेहराज मलिक बोलने का अवसर नहीं मिलने से नाराज होकर सदन के वेल में पहुंच गए। वह अपनी बात रखने की कोशिश करते रहे और इस दौरान नेकां विधायकों से भी बातचीत करते दिखाई दिए।
स्पीकर ने उन्हें वेल से हटने को कहा। विरोध जारी रहने पर उन्होंने मार्शलों को मलिक को सदन से बाहर ले जाने का निर्देश दिया। इसके बाद मार्शलों ने आप विधायक को सदन से बाहर कर दिया।
सुरक्षा हटाए जाने का भी उठाया था मुद्दा
मेहराज मलिक ने इससे पहले आरोप लगाया था कि विधानसभा सत्र से पहले उनका एस्कॉर्ट और ड्राइवर हटा लिया गया और बाद में उन्हें दिए गए दो पीएसओ भी वापस बुला लिए गए।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर विधानसभा के एकमात्र ऐसे विधायक हैं, जिनके पास एस्कॉर्ट, ड्राइवर और पीएसओ नहीं हैं। मलिक ने अपनी सुरक्षा को लेकर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही थी।
अंतिम दिन सदन में नहीं पहुंचे उमर अब्दुल्ला
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अंतिम दिन विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। वह इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। फारूक अब्दुल्ला माकपा नेता एमवाई तारिगामी और जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के कुछ नेताओं के भी बैठक में शामिल नहीं होने की संभावना जताई गई है।