25-26 में 10 मैचों में 60 विकेट
इस टूर्नामेंट में कुल मिलाकर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे हैं। ये महज अच्छे दौर नहीं हैं। ये ऐसे प्रदर्शन हैं जो किसी भी खिलाड़ी के करियर को नई पहचान देते हैं। और फिर भी लगातार दूसरे साल उन्हें एक ऐसे दरवाजे का सामना करना पड़ा जो पूरी तरह से बंद रहा।भारत के पूर्व बल्लेबाज सुरेश रैना ने कहा कि नबी को बहुत पहले ही मौका मिल जाना चाहिए था। राहुल जो टेस्ट टीम के उप-कप्तान होंगे और जिन्हें उस रणजी फाइनल में नबी ने आउट किया था, ने नपी-तुली लेकिन दमदार शब्दों में उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि वह निश्चित रूप से ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें हम आगे बहुत देखने वाले हैं। उन्होंने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपना एक बड़ा नाम बनाया है। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी नबी के भारतीय टीम के चयन को लेकर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रणजी ट्रॉफी के प्रदर्शन को हतोत्साहित न करें।
श्रीनगर में इस बात पर हैरानी के साथ-साथ एक राजनीतिक नाराजगी भी थी।
पीडीपी नेता वहीद उर रहमान पर्रा ने इस फैसले को सचमुच चौंकाने वाला बताया और कहा कि नबी की तारीफ प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री ने की थी और अब बीसीसीअई ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया।जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन ने भी अपने सोशल मीडिया पर इसको लेकर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि घरेलु क्रिकेट में 60 विकेट लेने और जम्मू कश्मीर को रणजीट्रॉफी जीतने में मदद करने के बावजूद आकिब नबी को अभी भी अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट स्क्वाड में शामिल नहीं किया गया।
स्थानीय क्रिकेटर निराश, बोले आकिब भाई के जो आंकड़े हैं उससे ज्यादा और क्या कर दिखाते वो ?
घाटी के युवा क्रिकेटरों में भी निराशा दिखी। क्रिकेटर यावर अहमद ने भी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि आकिब भाई ने हमें यह विश्वास दिलाया कि एक कश्मीरी लड़का भी भारत की कैप पहन सकता है। हमने उस पल का इंतजार किया। अब हमारे पास सवालों के अलावा कुछ नहीं बचा है। वह और क्या कर सकते थे। क्या एक पैर पर खेलकर दिखाते। युवा क्रिकेटर आमिर हुसैन ने कहा कि बारामुला में बड़े होते हुए क्रिकेट में हमारा कोई ऐसा रोल मॉडल नहीं था जो हमारी अपनी जमीन का हो। हम कोहली और धोनी को देखते थे लेकिन ऐसा लगता था कि वे किसी दूसरी दुनिया के हैं। फिर आकिब आए। वह हममें से ही एक थे। वह हमारी ही तरह बोलते थे। उन्होंने बिल्कुल जमीन से उठकर रणजी ट्रॉफी जीती।
मुझे बस उस संदेश की चिंता है जो बाहर जा रहा है: हर्षा भोगले
वरिष्ठ क्रिकेट कमेंटेटर और पत्रकार हर्षा भोगले ने भी नबी के चयन पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुझे मानना पड़ेगा, मुझे लगा था कि आकिब नबी वहां (टीम सूची में) होंगे। इस बारे में कुछ चर्चा है कि क्या वह काफी तेज हैं या नहीं। मेरे लिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह किस गति से गेंदबाजी कर रहे हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कितनी धीमी गेंदें डाल रहे हैं। अगर उन्होंने आपको दो वर्षों में लगभग 14 की औसत से 100 से ज्यादा विकेट दिए हैं, तो उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने वाले दूसरे लोगों को यह याद दिलाने के लिए कि देखो, अगर तुम ऐसी परफॉर्मेंस दोगे तो तुम टेस्ट टीम में जगह बना लोगे। मुझे इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि आकिब नबी टेस्ट मैच में, असल स्तर पर नहीं खेल रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि जो संदेश जाना चाहिए वह यह है कि वह खेल रहे हैं। देखो, मुझे नहीं लगता कि फिटनेस कोई मुद्दा है। आकिब नबी ने वह सब कुछ किया है जो भारत में एक गेंदबाज कर सकता है। मेरा मतलब है, याद रखो, वह आपको नंबर नौ पर बल्लेबाजी का भी थोड़ा विकल्प देते हैं। लेकिन यह बात बेमानी है। तो, मैं निराश हूं, मुझे यकीन है, देखो, मैंने इस चयन समिति के बारे में पढ़ा है। चलो ईमानदार रहें। और आकिब नबी को न चुनने के पीछे उनके अपने विचार जरूर रहे होंगे, लेकिन मुझे बस उस संदेश की चिंता है जो बाहर जा रहा है।