हैदरपोरा मुठभेड़ के बारे में बताया डीजीपी दिलबाग सिंह।
- फोटो : बासित जरगर
हैदरपोरा में 15 नवंबर को एक पाकिस्तानी आतंकवादी के साथ तीन अन्य लोग मारे गए थे। पुलिस ने दावा किया था कि मारे गए सभी लोग आतंकवादी थे। जबकि तीन लोगों के परिवार ने दावा किया था कि वे निर्दोष थे। इसके बाद उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 नवंबर को घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे।
स्थानीय पुलिस नियंत्रण कक्ष में एसआईटी के प्रमुख व मध्य कश्मीर के डीआईजी सुजीत कुमार ने संवाददाता सम्मेलन मे बताया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूत बताते हैं कि जिस इमरात में विदेशी आतंकी बिलाल मारा गया उस इमारत के मालिक अल्ताफ को दहशतगर्द ने एक मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया।
श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में मुठभेड़ के दौरान जवान।(फाइल)
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उन्होंने कहा कि हमारी अब तक की जांच से पता चला है कि डॉ. मुदासिर गुल को इमारत के अंदर छिपे विदेशी आतंकवादी ने मार दिया था क्योंकि उनका शरीर अटारी (कमरे में सामान रखने के लिए बनाई गई छत) से बरामद किया गया था। उन्होंने कहा कि तलाशी अभियान के पहले अथवा उसके बाद सुरक्षा बल कभी अटारी पर नहीं गए। मुदस्सिर गुल कुत्ते पर लगे कैमरे से एक ऐसे स्थान पर मिला जहां सुरक्षा बल का कोई व्यक्ति न तो आया और न ही गोली मारी। सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि डॉ मुदासिर गुल श्रीनगर शहर में अपने वाहन में विदेशी आतंकवादी के साथ यात्रा कर रहे थे।
आतंकी ने अल्ताफ व आमिर को बनाया मानव ढाल
डीआईजी ने आमिर माग्रे के बारे में बताया कि जांच से पता चला है कि डॉक्टर गुल का कर्मचारी आमिर माग्रे विदेशी आतंकवादी बिलाल के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा था, जो ऑपरेशन के दौरान भागने की कोशिश में मारा गया। उन्होंने कहा कि मोहम्मद अल्ताफ भट (भवन मालिक) और आमिर सुरक्षा बलों के साथ गोलीबारी में मारे गए क्योंकि उन्हें विदेशी आतंकवादी द्वारा मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि अल्ताफ दरवाजे के बाहर (गोली लगने के बाद) गिर गया, जबकि आमिर कुछ और कदम दौड़ने में कामयाब रहा और विदेशी आतंकवादी का शव 83 फीट दूर मिला।
श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में मुठभेड़ के दौरान जवान। (फाइल)
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20 से अधिक गवाहों से पूछताछ
जांच अधिकारी ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच के अलावा एसआईटी ने अब तक 20 से अधिक गवाहों से भी पूछताछ की है। इनमें से छह गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने भी दर्ज किए गए हैं। यह पूछे जाने पर कि अगर सुरक्षा बलों को अंदर आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी थी तो नागरिकों को घर की तलाशी के लिए क्यों भेजा गया, अधिकारी ने कहा कि भट ने स्वेच्छा से अंदर जाने के लिए कहा था क्योंकि उन्हें पूरा यकीन था कि कोई अंदर नहीं छिपा हुआ है। उन्होंने कहा, उनमें से किसी ने भी सुरक्षा बलों को अंदर आतंकवादी की मौजूदगी के बारे में नहीं बताया और न ही कोई मदद मांगी।
बार-बार बांदीपोरा जाता था आमिर
आमिर की संलिप्तता पर एसआईटी प्रमुख ने कहा कि इमारत में कोडीन की बोतलें और सर्दियों के परिधान जैसे सामान का मिलना इशारा करता है कि यह आतंकियों का एक ठिकाना था। हमें पता चला है कि आमिर अक्सर बांदीपोरा का दौरा करता था। जब वह (उनका परिवार) 2008 में उस जगह से चला गया था तो वह बांदीपोरा क्यों जाता था? आमिर बांदीपोरा में हुए पुलिस पर हमले में जमालट्टा में आतंकी बिलाल के साथ था।
विदेशी आतंकी के शरीर में मिला डोंगल
डीआईजी ने कुछ गवाहों के बयानों का हवाला दिया, जिनसे यह निष्कर्ष निकला कि इमारत का इस्तेमाल आतंकवादियों द्वारा ठिकाने के रूप में किया गया था। उन्होंने बताया कि हमें विदेशी आतंकवादी के शरीर से एक डोंगल मिला। डिवाइस की लोकेशन 14 नवंबर को जमालट्टा में थी जहां फायरिंग की घटना हुई थी।
मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी
यह पूछे जाने पर कि क्या जांच के बारे में पुलिस का खुलासा केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा आदेशित मजिस्ट्रेट जांच को रोक सकता है। पुलिस महानिरीक्षक कश्मीर क्षेत्र विजय कुमार ने कहा कि जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और चार दिन पहले सरकार को रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। सरकार ने जिलाधिकारी को संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मुठभेड़ के दौरान मौके पर सुरक्षाबल।
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अल्ताफ के परिवार ने संतोषजनक जानकारी नहीं दी
जांच अधिकारी ने बताया कि भवन मालिक अल्ताफ भट के परिवार ने उन्हें उचित जवाब नहीं दिया है कि किराए पर कौन रह रहा था, किराया भुगतान का कौन सा तरीका इस्तेमाल किया जा रहा था, अल्ताफ के परिवार से कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली है।
परिवार को सौंपे गए थे भट व गुल के शव
मालूम हो कि 15 नवंबर को मुठभेड़ के बाद अल्ताफ भट, डॉ. मुदासिर गुल और आमिर माग्रे के परिवारों ने दावा किया था कि वे निर्दोष हैं और उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर उनके शवों को वापस करने की मांग की। प्रदेश के कई राजनीतिक दलों ने भी इस मांग का समर्थन किया। इसके बाद प्रशासन ने 18 नवंबर को भट और गुल के शव कब्र से निकालकर परिवार को सौंप दिए गए थे।