कहीं ऐसा तो नहीं है कि यह विकास विरोधी है?
मैं विकास विरोधी नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि यहां उद्योग लगें और खूब खनन भी हो, लेकिन जो हो यहां के लोगों की मर्जी से हो। हम छठे शेड्यूल से लद्दाख को बंद नहीं करना चाहते। योजनाओं में यहां के लोगों को शामिल किया जाए। उन्हें लाभ लगे तो हां करें और न लगे तो ना करें। अभी यहां पर एक पावर प्रोजेक्ट लग रहा है लेकिन उन्होंने जो जमीन चुनी है, वह चरवाहों के लिए सबसे बेहतर जगह है। अच्छा होता कि यहां के लोग बताते कि पावर प्रोजेक्ट कहां लगे। कोई भी उद्योगपति 15 साल निचौड़ के चला जाएगा और यहां की जनता देखती रह जाएगी। इसलिए यहां के लोगों के हाथ में ही निर्णय रहना चाहिए।
कहीं आप राजनेता तो नहीं बनना चाहते हैं?
मैं राजनीति को खराब नहीं मानता हूं। पवित्र जगह है, बस लोग गलत आ गए हैं। मैं इसमें नहीं आना चाहता लेकिन यह इच्छा है कि सही लोग इसका हिस्सा बनें। मैं खुद कोई पद लूं तो ऐसा मैं कभी नहीं करूंगा।
चुनाव में क्या असर होगा, लेह व कारगिल के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता दिख रही है?
देखिए मैं तो चाहता हूं कि किसी तरह से बंटवारा न हो। यह बदकिस्मती है कि ऐसा हो रहा है। मैं चाहता हूं कि इस बार मुद्दों पर लोग वोट करें। पहले की तरह आज भी भाजपा के लोग वादा करें और निभाएं तो लोग उनका समर्थन करें। ऐसा नहीं है तो फिर कौन किसको वोट दे, यह उसकी मर्जी है।
आपने आंदोलन या धरना खत्म क्यों कर दिया?
यह अनशन और धरना 66 दिन तक चला। हम अपनी मांग तो रखना चाहते हैं, लेकिन चुनाव के वक्त ऐसे संवेदनशील समय में कोई व्यवधान उत्पन्न करना नहीं चाहते थे। हमारा उद्देश्य था कि लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। जब नई सरकार आएगी, तो जून में 4 बिंदुओं पर फिर सरकार से बात की जाएगी। अभी अर्धविराम है, पूर्ण विराम नहीं।
आपने सबसे ज्यादा काम किस क्षेत्र में किया है?
मैंने शिक्षा में सबसे ज्यादा काम किया है। पर्यावरण पर काम करूं या आंदोलन तो मंशा रहती है कि लोगों को शिक्षा मिले। सरकारी विद्यालयों में ऐसे छात्रों के लिए काम करते हैं, जो उतने प्रतिभाशाली नहीं हैं। उन्हें नए नजरिए से आगे बढ़ने का मौका देते हैं। हमने ऐसे भवन बनाए जो बाहर के तापमान से अलग-अलग मौसम में भी ऐसे ही रहते हैं। हमारे यहां पर जो लोग स्थानीय मिट्टी से घर की दीवार बनाते हैं वह छह सौ साल तक चल सकती है। सूरज और मिट्टी के मेल से हर गरीब को मजबूत घर मिल सकता है।