आतंकी संगठन गणतंत्र दिवस पर फिदायीन हमले कर सकते हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों को इस बाबत सूचनाओं के बाद सीमांत इलाकों और एलओसी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जम्मू रेंज के आईजी राजेश कुमार ने कहा है कि तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और चौकसी बढ़ा दी गई है।
जम्मू संभाग के कई इलाके आतंकवादियों के पनाहगाह रहे हैं लिहाजा गणतंत्र दिवस के आयोजनों पर सुरक्षा इस बार पुलिस के लिए कड़ी चुनौती है। डीजीपी अशोक प्रसाद ने सांबा और हीरानगर के सीमांत इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया है। आईजी ने भी इन इलाकों में पुलिस अधिकारियों और जवानों की बैठक लेकर उन्हें सुरक्षा के खास टिप्स दिए हैं। आईजी और डिविजनल कमिश्नर शांतमनु ने सुरक्षा व्यवस्था के बारे में गर्वनर एन एन वोहरा को भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा दी है।
आईजी राजेश कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि जम्मू संभाग से पाकिस्तान की अतंरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी का लगभग 400 किलोमीटर का इलाका पड़ता है। इस कारण हमेशा सतर्कता बरतनी पड़ती है। पिछले साल हीरानगर की अंतरराष्ट्रीय सीमा से तीन फिदायीन घुसपैठ करने में सफल हो गए थे। हीरानगर थाना और सांबा सैन्य शिविर पर हमले हुए।
उन्होंने कहा कि जरा सी चूक किसी भी इलाके से घुसपैठ को संभव बना सकती है। इसलिए हमेशा सतर्कता का हाई लेबल मैनटेन किया जा रहा है। आतंकी गणतंत्र दिवस पर हमले की साजिश रचते रहे हैं। पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इस बार भी कुछ इनपुट हैं लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। आतंकी संगठन लगातार कोशिशें करते रहे हैं। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
आईजी ने कहा कि वर्तमान में जम्मू संभाग में कुछ आतंकी सक्रिय हैं। इनकी संख्या पर विवाद हो सकता है लेकिन उनकी सक्रियता की जानकारी पुलिस को है। आतंकियों और उनके मददगारों के इलाके चिह्न्ति किए जा रहे हैं। इस संबंध में लगातार जांच अभियान चलता रहता है। कोई विशेष जानकारी के बाद कार्रवाई की जाती है।
आईजी राजेश ने कहा कि इन आतंकियों को समाप्त करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सेना और सुरक्षा बलों से तालमेल बनाकर इस संबंध में रणनीति बनाई जाती है। सेना और सुरक्षा बलों में अच्छा तालमेल है। पुलिस की सेना के साथ लगातार बैठकें होती हैं जिसमें संयुक्त रणनीति को अंजाम दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत जम्मू कश्मीर के पुलिस जवानों को आधुनिक हथियार, बुलैट प्रूव जैकेट और अन्य उपकरण दिए गए हैं। यह योजना अभी चल रही है। पुलिस बल को और सक्षम बनाया जा रहा है। प्रशिक्षण की भी खास व्यवस्था की गई है। चुनाव के लिए भी तैयारियां की जा रही हैं। हमारी पुलिस फोर्स आतंकी संगठनों की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। आबादी के अनुपात के हिसाब से जम्मू में पुलिस बल की संख्या पर्याप्त है। हम राष्ट्रीय औसत के करीब हैं। जवानों की और भर्ती के बारे में रियासत सरकार को फैसला लेना है।