आरईटी शिक्षकों के स्क्रीनिंग टेस्ट को लेकर राज्य सरकार ने अब नरम रुख अपना लिया है। पहले जहां स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद ही आरईटी शिक्षकों को स्थायी बनाने के आर्डर निकालने की बात की जा रही थी, तो अब शिक्षा विभाग ने बिना टेस्ट के ही स्थायी आर्डर जारी करने की लगभग तैयारी कर ली है। इससे आने वाले दिनों में आरईटी शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।
करीब आठ महीने पहले आरईटी शिक्षकों को नियमित करने को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने के आदेश जारी किए थे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने 60 हजार के करीब आरईटी शिक्षकों के डाक्यूमेंट की जांच की थी।
जांच के बाद हजारों की संख्या में ऐसे आरईटी शिक्षक सामने आए थे, जो बाहरी डिस्टेंस मोड और बाहरी राज्यों से डिग्री लेकर आरईटी शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे। इसी कारण शिक्षा विभाग ने 5000 के करीब आरईटी शिक्षकों को स्थायी बनाने की प्रक्रिया को बंद कर दिया था।
शिक्षा विभाग ने शर्त रखी थी की जो भी शिक्षक स्क्रीनिंग टेस्ट को पास करेगा उसको ही स्थायी बनाए जाने के आर्डर जारी किए जाएंगे। इसके बाद आरईटी शिक्षकों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। जनवरी में सरकार गिरने के बाद मामला थोड़ा ठंडा पड़ गया।
अप्रैल में एक बार से सरकार बनी है, लेकिन इस बार सरकार ने आरईटी शिक्षकों को लेकर नरम रुख अपना लिया है। सरकार ने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले आरईटी शिक्षकों को नियमित करने के निर्देश दोनों संभाग के शिक्षा निदेशक को दे लिए हैं। अब इसमें डिस्टेंस मोड डिग्री वाले आरईटी शिक्षकों को समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। लेकिन जो आरईटी शिक्षक नकली डिग्री लेकर आए हैं, उनको लेकर सरकार का रुख सख्त है।