हाईकोर्ट ने जम्मू एवं कश्मीर सरकार को वर्ष 1989 में अशांति के कारण घाटी छोड़ने वाले पांच कश्मीरी पंडितों की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अनंतनाग के उपायुक्त को कहा है कि वे हर छह माह में याचिकाकर्ता की भूमि का निरीक्षण करें।
न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ ने कहा कि यदि भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा पाया जाता है तो उसे तुरंत हटाया जाए। अदालत ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि आदेश का जम्मू-कश्मीर सरकार उचित तरीके से पालन करे।
इस मामले में पांच याचिकाकर्ताओं में से अधिवक्ता बीएल वली व दो अन्य लोग दिल्ली में रह रहे हैं। जबकि शेष दो में से एक पानीपत में रह रहा है और एक जम्मू में। सभी याचिकाकर्ता वरिष्ठ नागरिक हैं। याची वली ने कहा कि उनके रिहायशी मकान में लूटपाट कर स्थानीय बदमाशों ने आग लगा दी।
ऐसे में घाटी में उनकी वापसी मुश्किल है। याची ने कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य प्रशासन की लापरवाही और लाचारी के कारण उनकी संपत्तियों पर कब्जे हो रहे हैं। वे उसकी रक्षा करने में असमर्थ हैं। अदालत ने कहा कि यह याचिका पिछले 11 वर्षों से लंबित थी और 2005 में इस मामले में संपत्ति सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम आदेश दिया गया था।