पीठासीन अधिकारी संजीव गुप्ता ने नाबालिग लड़की से बलात्कार करने के आरोपी पिशोरी लाल को 18 साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पुलिस केस के अनुसार 10 अप्रैल, 2009 को नवाबाद थाने के एसएचओ अरुण जम्वाल रूटीन पेट्रोलिंग पर थे। उन्होंने देखा मंदिर के नजदीक एक एंबेसेडर कार संदिग्ध परिस्थितियों में खड़ी है।
कार के काले शीशे भी बंद हैं। पुलिस ने कार को खोला। कार के अंदर लड़की और पिशोरी लाल संदिग्ध अवस्था में थे।
दोनों की पहचान पूछी गई। लड़की के बयान भी दर्ज किए। लड़की ने बताया कि उसका अपनी सौतेली मां से सुबह झगड़ा हो गया था। वह घर छोड़कर आ गई और बस स्टैंड जा रही थी।
उसके मामा का घर बस स्टैंड के नजदीक है। जब वह स्टेडियम के नजदीक हैंडपंप पर पानी पी रही थी तो आरोपी सफेद रंग की अंबेसेडर कार के बाहर खड़ा था। उसने लड़की से बातचीत शुरू की।
लड़की ने सारी कहानी आरोपी को सुना दी। उसके पास पैसे भी नहीं थे और आरोपी के झांसे में आ गई। उसे कार में बैठने के लिए कहा और आश्वासन दिया कि वह मामा के घर तक उसे छोड़ देगा।
कार में बैठते ही आरोपी ने धमकी दी और उसकी मर्जी के खिलाफ उससे बलात्कार किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।
एडवोकेट प्रिंस खन्ना और पब्लिक प्रोसीक्यूटर जीएस चाढ़क की दलीलों के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी ने 376, 363 आरपीसी में 12 साल और पांच साल कैद और एक लाख जुर्माना और 342 आरपीसी में एक साल कैद और एक हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
सभी सजाओं को अलग-अलग भुगतना होगा और जुर्माने की रकम को पीड़ित लड़की को देने का फैसला सुनाया।